MPACS से जुड़े 13 लाख सदस्य के डेटा का काम करना चुनौतीपूर्ण, पूरे देश में सबसे पहले किया: रावत

Edited By Nitika, Updated: 01 Aug, 2022 12:31 PM

statement of dhan singh rawat

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समाज में जो लोग पीछे रह गए हैं व छूटे हुए हैं, उन्हें सहकारिता विभाग आगे बढ़ाएगा, ऐसा उनका पूर्ण विश्वास है।

 

देहरादून(कुलदीप रावत): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समाज में जो लोग पीछे रह गए हैं व छूटे हुए हैं, उन्हें सहकारिता विभाग आगे बढ़ाएगा, ऐसा उनका पूर्ण विश्वास है।

पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री जनता दर्शन हॉल में सहकारिता विभाग की 108 एम पैक्स के कंप्यूटरीकरण ऑनलाइन कार्यक्रम व छरबा में टीएमआर प्लांट भवन के शिलान्यास के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सहकारिता विभाग ने बहुत अच्छा काम किया है। अन्य प्रदेशों के लिए उत्तराखंड सहकारिता की योजनाएं प्रेरणा का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदेश के हर विभाग की समीक्षा 3 महीने में करते हैं। सहकारिता का नंबर भी इस बार आ जाएगा। उन्होंने सहकारिता विभाग के अफसरों से कहा कि वह 2025 का रोडमैप तैयार करें, आने वाले समय में सहकारिता क्रांतिकारी परिवर्तन करेगा। मुख्यमंत्री ने सहकारिता मंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने और उनकी टीम ने गांव और न्याय पंचायत स्तर पर सहकारी समितियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म में लाया है। 
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मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वरोजगार ऋण देने में जो मानक अपनाए जा रहे हैं, उन्हें और सरलीकरण किया जाए। अफसरों को दूरदराज से आए ग्रामीणों के काम करने की नियत से काम करना चाहिए। उत्तराखंड के सहकारिता विभाग के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि देश में सबसे पहले उत्तराखंड की जमीन पर गांव और न्याय पंचायत स्तर पर बहुद्देशीय सहकारी समितियों का डिजिटलीकरण का सपना देखा था, वह सपना आज पूरा हो रहा है। 13 लाख सदस्यों का डाटा 2 साल में कलेक्ट करना बड़ी चुनौती पूर्ण कार्य था, जिसे समय पर पूरा किया गया।  डॉ. रावत ने बताया कि, 670 समितियों के कंप्यूटराइजेशन करने के लिए बीते 6 साल में 100 से अधिक समीक्षा बैठक ली गई और तमाम तकनीकी विशेषज्ञों से सार्थक बात की। इसमें नाबार्ड को शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि समय समय पर एमपैक्स का भ्रमण, गांव स्तर पर डिजिटल प्लेटफार्म की समीक्षा, उनकी कड़ी मेहनत, लग्न, लक्ष्य का ही नतीजा है कि देश में पहले राज्य उत्तराखंड में ग्रामीणों को कंप्यूटराइजेशन की सौगात मिलने जा रही है। उत्तराखंड राज्य के सहकारिता विभाग के एमपैक्स समिति सदस्यों की संख्या लगभग 13 लाख है। आज 108 एम पैक्स का कम्प्यूटरीकरण होने से करीब 2 लाख से अधिक लोगों के खातें डिजिटल प्लेटफार्म पर आ गए हैं। इसके फलस्वरूप राज्य के 5 लाख से अधिक ग्रामीण जन लाभान्वित हो सकेंगे। 

उत्तराखंड राज्य की 108 बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति एमपैक्स का रविवार को ऑनलाइन कम्प्यूटरीकरण किया गया है। शेष 562 एमपैक्स का कम्प्यूटरीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। राज्य में कुल 670 एमपैक्स हैं। 108 एमपैक्स को कंप्यूटराइज्ड होने से किसानों को फायदा मिल रहा है। कंप्यूटराइज्ड होने के बाद पैक्स उर्वरक, बीज आदि जैसे कृषि इनपुट के प्रावधान के लिए सरकार की यह कोशिश बैंकिंग गतिविधियों के साथ-साथ गैर-बैंकिंग गतिविधियों के केन्द्र के रूप में एमपैक्स की पहुंच बेहतर हो गई है।  उत्तराखंड राज्य में 108 समितियों को किया जा चुका है ऑनलाइन उत्तराखंड में कृषि सेक्टर में छोटे और सीमांत किसानों को मजबूत करने के लिए पैक्स एक बड़ी योजना है। पैक्स यानी "प्राथमिक कृषि समितियां" जो देशभर में किसानों को ऋण देने के लिए सबसे छोटी इकाई हैं और किसानों को इसके माध्यम से प्रोत्साहित किया जाता है। पारदर्शिता के लिए इन समितियों को ऑनलाइन किया जा रहा है। तकरीबन 108 समितियां ऐसी हैं जिन को अब तक ऑनलाइन किया जा चुका है। इसके लिए उत्तराखंड देश के सबसे अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। अगस्त 2020 से ही प्रदेश के सभी बहुद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को कंप्यूटरीकृत करने पर काम चल रहा है। समितियों के खातें ऑनलाइन किए जाने की व्यवस्था सुगमतापूर्वक की जा सकेगी। एमपैक्स कम्प्यूटरीकरण से बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों में जमा सदस्यों/ग्रामीणों की पूंजी सुरक्षित हो सकेगी। साथ ही जमा एवं निकासी आसान हो सकेगी।
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एमपैक्स कम्प्यूटरीकरण से गांव का किसान या खाताधारक अपनी जमा को कहीं भी आसानी देख सकता है और रुपए डेबिट कार्ड के माध्यम से सम्पूर्ण देश में कहीं से भी उपयोग में ला सकता है। एमपैक्स कम्प्यूटरीकरण से समितियां जमा, विपणन, उपभोक्ता, संयुक्त सहकारी कृषि लेन देन, डीबीटी आदि कार्य सुगमतापूर्वक कर सकेंगी। मंत्री डॉ. रावत ने कहा कि राज्य में 670 बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (एमपैक्स) की दक्षता बढ़ाने तथा उनके संचालन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाने और पैक्स को अपने व्यवसाय में विविधता लाने व विभिन्न गतिविधियां/सेवाएं शुरू करने की सुविधा प्रदान करना भी सरकार का एक प्रमुख उद्देश्य है। 

सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि, प्रदेश की बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (एमपैक्स) को डिजिटल रूप से सशक्त करने हेतु एमपैक्सों को कम्प्यूटरीकृत किए जाने की आवश्यकता के दृष्टिगत राज्य सरकार सहकारी बैंक एवं नाबार्ड के सहयोग रुपए 37.52 करोड़ की लागत से इन प्राथमिक सहकारी संस्थाओं को डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने की संकल्पना की गई, जिससे कि भारत सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रम "डिजिटल इंडिया" के क्रियान्वयन में भी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। प्रदेश की 670 एमपैक्स के कम्प्यूटरीकरण का कार्य  2019 से आरम्भ किया गया। उत्तराखंड राज्य में 108 एमपैक्स का कंप्यूटरिकरण ऑनलाइन किया जा रहा है। शेष 562 बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (एमपैक्स) का कम्प्यूटरीकरण का कार्य 60 से 90% पूरा हो गया है।  राज्य की बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों को डिजिटल प्लेटफार्म पर लाये जाने के फलस्वरूप सहकारी आन्दोलन को बल मिलने के साथ ही राज्य के लोगों किसानों एवं समितियों के सदस्यों को निम्नानुसार लाभान्वित किया जाना लक्षित है। 

जानिए क्या है MPACS के फायदे?
- एमपैक्स यानि बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियां जिनके किसान सदस्य होते हैं।
- सहकारिता में यह सबसे छोटी ऋण इकाई है, जो ग्राम स्तर पर होती है।
- साहूकारों के चंगुल से किसानों को बचाए रखने के लिए गठित किए गए थे।
- एमपैक्स.समितियों के माध्यम से किसानों को सस्ता ब्याज मिलता है।
- खाद, बीज और दवाइयों तक की समितियों के माध्यम से उपलब्धता होती है।
- फसल लोन भी समितियों के माध्यम से मिलना आसान होता है।
- समय से कर्ज चुकाने पर ब्याज में भी छूट मिलती है।
- कृषि संयंत्र खरीदने के लिए भी 20 लाख तक राशि मिलती है।
- दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना, जिसमें किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से योजना के अंतर्गत 6.41 लाख लाभार्थियों एवं 3837 स्वयं सहायता समूह को 3630 करोड़ को ब्याज रहित ऋण वितरण किया गया। कार्यक्रम में 5 महिला समूह को 5-5 लाख के 0% ब्याज दर पर ऋण वितरण किया गया। यह समूह अपनी आमदनी दोगुनी करेंगे। मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री डॉ. रावत ने इन समूह की महिलाओं को चेक सौंपा।
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इन स्वयं सहायता समूह के नाम हैंः-
शम्भू महिला समूह 
हेमा महिला समूह 
मां पार्वती महिला समूह 
मांहेश्वरी महिला समूह 
राधे-श्याम महिला समूह 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रिमोट का बटन दबाकर उत्तराखंड की 108 एमपैक्स को लाइव किया। यह गांव और न्याय पंचायत स्तर पर यह समितियां अब बैंक जैसा कार्य कर सकेंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में कहा कि मोदी सरकार 'आजादी के अमृत महोत्सव' कार्यक्रम के तहत 13 से 15 अगस्त तक 'हर घर 'तिरंगा' अभियान चलाने जा रही है। इसके तहत, इन तीन दिनों में घरों में तिरंगा फहराने की योजना है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आए किसानों और सहकारिता से जुड़े हुए अधिकारियों से कहा कि वह अपने टि्वटर हैंडल, फेसबुक, व्हाट्सएप की डीपी में तिरंगा लगाएं।  

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