UP Election 2022: डिजिटल प्रचार के कारण ठप हुआ बैनर और झंडियों का धंधा

Edited By Tamanna Bhardwaj, Updated: 25 Jan, 2022 08:21 PM

up election 2022 business of banners and flags stalled

कोविड-19 महामारी के मद्देनजर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की रैलियों और रोड शो पर चुनाव आयोग की रोक के कारण प्रचार सामग्री का धंधा बिल्कुल ठंडा पड़ गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों के...

लखनऊ: कोविड-19 महामारी के मद्देनजर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की रैलियों और रोड शो पर चुनाव आयोग की रोक के कारण प्रचार सामग्री का धंधा बिल्कुल ठंडा पड़ गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों के दफ्तरों से सटे इलाकों में रंग बिरंगी प्रचार सामग्रियों से पटी पड़ी दुकानों पर खरीददार नहीं हैं। पार्टी कार्यालयों पर टिकट मांगने वालों की भीड़ जरूर है लेकिन प्रचार सामग्री खरीदने वाले इक्का-दुक्का लोग ही हैं। खरीददारों की राह देख रहे दुकानदारों की हालत यह है कि उन्हें अपने रोजमर्रा के खर्चे निकालना भी मुश्किल हो चुका है।

भाजपा प्रदेश मुख्यालय के बगल में प्रचार सामग्री बेचने वाले रघुराज पाल ने कहा, "मैं रोज सोचता हूं कि आज कुछ बिक्री हो जाएगी लेकिन अभी तक का अनुभव बहुत खराब है। मेरी दुकान में काम करने वाले तीन लोग हैं, लेकिन बिक्री की हालत यह है कि दुकान का खर्च नहीं निकल पा रहा है।" उन्होंने कहा कि आज उतनी भी बिक्री नहीं रह गई है जितनी चुनाव की घोषणा से पहले हो रही थी। वह और उनके जैसे तमाम दुकानदार 31 जनवरी के बाद का इंतजार कर रहे हैं। इस उम्मीद में कि चुनाव आयोग रैलियों और जनसभाओं पर लागू प्रतिबंध हटाएगा और प्रचार सामग्री का बाजार एक बार फिर गुलजार हो जाएगा।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए चुनावी रैलियों और रोड शो पर आगामी 31 जनवरी तक पाबंदी लगा दी है पाल ने कहा "हमने लाखों रुपये की प्रचार सामग्री उधार ले ली थी। अब जब हमसे रकम का तकाजा किया जाता है तो हमारे लिए संतोषजनक जवाब देना मुश्किल हो जाता है।" मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के दफ्तर के नजदीक प्रचार सामग्री की दुकान का भी नजारा इससे अलग नहीं है। समाजवादी पार्टी दफ्तर के सामने प्रचार सामग्री बेचने वाले अनिल सक्सेना ने कहा कि जब से चुनाव प्रचार का काम डिजिटल मंच पर शुरू हुआ है तब से बैनर और झंडी का कोई खरीदार नहीं रहा। उन्होंने कहा, "मैं दिल्ली, अहमदाबाद और हैदराबाद से चुनाव प्रचार सामग्री लाता हूं लेकिन इस वक्त दुकान में सारा माल बेकार पड़ा हुआ है।" 

सक्सेना की दुकान के बगल में मौजूद प्रचार सामग्री विक्रय केंद्र की आयुषी सक्सेना का कहना है कि प्रत्याशियों की घोषणा में हो रही देरी की वजह से भी प्रचार सामग्री की बिक्री मंद पड़ी है। उन्होंने कहा कि पहले प्रत्याशियों की तस्वीर वाले कार स्टीकर खूब दिखते थे लेकिन प्रत्याशी घोषित नहीं हुए हैं तो क्या हो सकता है। उन्होंने कहा, "हम अक्सर यह सोच कर चुनाव का इंतजार करते थे कि कारोबार अच्छा होगा, लेकिन हमने कभी नहीं सोचा था कि चुनाव की सरगर्मी शुरू होने के बावजूद हमारा कारोबार इतना मंदा रहेगा।" पाल ने कहा,‘‘ चूंकि भाजपा सत्ताधारी पार्टी है इसलिए इसके नेता तथा समर्थक चुनाव आयोग के निर्देशों का सख्ती से पालन कर रहे हैं। इसलिए भाजपा कार्यालय के पास की उनकी दुकान पर बिक्री ही नहीं हो रही।'' 
 

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