हजारों साल पुराना है मां माहेश्वरी मंदिर का इतिहास, चैत्र और शारदीय के नवरात्रि में लगता भव्य मेला, लोगों की मन्नत होती है पूरी

Edited By Purnima Singh,Updated: 05 Apr, 2025 04:29 PM

the history of maa maheshwari temple is thousands of years old

हमीरपुर जिले से मात्र 50 किलोमीटर दूरी पर जलालपुर क्षेत्र के भेड़ी डांडा में माता महेश्वरी देवी के मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। मंदिर में चैत्र और शारदीय के नवरात्रि में बुंदेलखंड के श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचते है, क्योंकि उनकी...

UP Desk : हमीरपुर जिले से मात्र 50 किलोमीटर दूरी पर जलालपुर क्षेत्र के भेड़ी डांडा में माता महेश्वरी देवी के मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। मंदिर में चैत्र और शारदीय के नवरात्रि में बुंदेलखंड के श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचते है, क्योंकि उनकी मन्नत पूरी होती है। पूरे क्षेत्र में नवरात्रि की धूम मची है और माता रानी के दर्शन के लिये सैलाब उमड़ रहा है। देवी गीत और जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। भेड़ी डांडा में महेश्वरी देवी के मंदिर में इन दिनों जवारा बोये गये है। तमाम भक्त तेज गर्मी और तपती जमीन की परवाह किये बिना 20 किलो मीटर की दूरी लेटकर तय करके माता के दरबार में पहुंच रहे है। माता महेश्वरी देवी का मंदिर बेतवा नदी के किनारे बना हुआ है। मां महेश्वरी देवी विकास समिति के अध्यक्ष अरुण कुमार ने बताया कि मंदिर बहुत पुराना है, यहां पुलिस बल श्रद्धालुओं की सहुलियत के लिये बड़ी संख्या में लगा दिया गया है। छतरपुर, विजावर, सागर, पन्ना के दुकानदार यहां पहुंच चुके है। यह मेला 10 दिन तक चलेगा।

मां महेश्वरी मंदिर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे 
यह मंदिर देवी शक्ति पीठों में एक है। यहां पर मां महेश्वरी पत्थर की शिला के रूप में प्रगट हुईं थीं। नित्य दर्शन को सैकड़ों की संख्या में लोग आते हैं। शारदीय व चैत्र नवरात्रि को यहां पर विशाल मेला लगता है। दूर-दूर से लोग माथा टेकने के लिए आते हैं। मंदिर में व्यवस्थाओं के लिए मंदिर समिति द्वारा दूर दराज से आने वाले भक्तों का पुख्ता इंतजाम किया जाता है और सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे जगह जगह लगाए गये हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा मेले में कड़ी सुरक्षा की जाती है।

मंदिर का इतिहास
मंदिर की स्थापना को लेकर कोई भी स्पष्ट उल्लेख नहीं है। लेकिन कहा जाता है कि सैकड़ों वर्ष यहाँ बेतवा नदी की तलहटी के पास जंगल हुआ करता था। मिट्टी खोदते समय देवी महेश्वरी शिला के रूप में प्रगट हुईं। महेश्वरी ने बनाया था। धीरे-धीरे मंदिर अपनी भव्य विशालता की ओर बढ़ता गया। आज देवी मंदिर का मुख्य द्वार नौ खंडीय बना हुआ है। जिसके अंतिम शीर्ष पर पांच कलश स्थापित है। मंदिर देश के कोने-कोने से आने वाले लोगों की आस्था व श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।

मां महेश्वरी मंदिर की विशेषता
मंदिर में श्रद्धा व आस्था से पूजन अर्चन करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यहां पर मनोकामनाओं के पूरा होने पर लोग घंटा, शेर, छत्र आदि चढ़ाने के साथ-साथ जीभ भी चढ़ा देते हैं। बच्चों के मुंडन व कनछेदन संस्कार भी कराते हैं। यहां मां महेश्वरी का 24 घंटे अखंड दीप प्रज्ज्वलित रहता है।

वास्तुकला
मंदिर प्राचीन देवी शक्तिपीठों की तर्ज पर बनाया गया है। मंदिर में जगह-जगह पर छोटे-छोटे देवी देवताओं के मंदिर बने हैं। जिनमें चंदेल व मराठा कालीन नक्काशी की गई है। मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर है।

ऐसे पहुंचे मंदिर
मंदिर जलालपुर बस स्टैंड से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर रिक्शा व टैंपों से पहुंचा जा सकता है। मंदिर बेतवा नदी किनारे स्थित है। मंदिर पर हर सोमवार  को भव्य बाजार लगता है। मंदिर अति प्राचीन है। यहां दूर-दूर से लोग माथा टेकने के लिए आते हैं और मन्नतें मांगते हैं। जिनकी मन्नतें पूरी हो जाती हैं वह मां को चढ़ौना भी चढाते हैं।

शारदीय व चैत्र नवरात्रि को लगता है मेला  
यहां शारदीय व चैत्र नवरात्रि को मेला लगता है। नवमी में देवी भक्तों का सैलाब उमड़ता है। दूर-दूर से लोग माथ टेकने व पूजन अर्चन को आते हैं। मां के दरबार में जो भी मुराद मांगी जाती है वह पूरी होती है। 

मेले के दृष्टिगत DM-SP ने किया निरीक्षण, माता के दरबार में टेका माथा 
हमीरपुर के जिलाधिकारी घनश्याम मीणा हमीरपुर एवं डॉ दीक्षा शर्मा पुलिस अधीक्षक हमीरपुर द्वारा थाना जलालपुर क्षेत्र के ग्राम भेड़ी जलालपुर स्थित मंदिर में रामनवमी को विशाल जवारा व सांग यात्रा व मेला की व्यवस्था तैयारियों को परखा। नवरात्रि मेले के मद्देनजर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने मेले की तैयारियों का जायजा लिया तथा सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु सम्बंधित को आवश्यक दिशा-निर्देश  दिए। 

अधिकारियों ने मेला परिसर में साफ-सफाई आदि का किया अवलोकन 
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मेला परिसर में साफ-सफाई, यातायात प्रबंधन, एवं सुरक्षा उपायों का गहन अवलोकन किया। उन्होंने पुलिस बल को निर्देशित किया कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा के लिए विशेष सतर्कता बरती जाए। साथ ही, सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता, बैरिकेडिंग, चिकित्सा सुविधा एवं अग्निशमन उपायों की भी समीक्षा की गई।

DM-SP ने अनुशासन बनाए रखने के दिए निर्देश 
जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को सतर्क रहकर अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भीड़ नियंत्रण, कानून-व्यवस्था व यातायात सुचारू रखने हेतु पुलिसकर्मी सक्रिय रहें एवं किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करें। इस मौके पर सरीला तहसील एसडीएम बलराम गुप्ता सीओ राजकुमार पाण्डेय तहसीलदार राम मोहन कुशवाहा सहित  थाना जरिया जलालपुर,चिकासी  के साथ मीटिंग ली व भीड़ को देखते हुए मेंले में सुरक्षा व्यवस्था हेतु पीएसी बल,फायर ब्रिगेड व सर्किल एवं थाना जलालपुर पुलिस को लगाया गया है। 

रविवार को एसडीएम बलराम गुप्ता व सीओ एवं थानाध्यक्ष जलालपुर ब्रजमोहन ने मंदिर व मेला परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण में मेला व मन्दिर समिति के सदस्यों से वार्ता कर बैरियर, मेला पार्किंग,पानी, लाइट, सीसीटीवी कैमरो सहित अन्य जानकारी ली और सम्बंधित को आवश्यक दिशा निर्देश दिये है।  और मेला सुरक्षा व्यवस्था दिशा निर्देश दिए ।मोके पर मेला समिति अध्यक्ष हरिकिशन द्विवेदी धीरज सिंह ,ग्राम प्रधान भेड़ी माँ महेश्वरी देवी विकास समिति  अध्यक्ष अरुण कुमार द्विवेदी ने डीएम व एसपी को स्मृति चिन्ह भेंट किया।

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