पुलिस का दावा-उप्र में 'भारत बंद' का कोई असर नहीं, अब तक 475 गिरफ्तार

Edited By PTI News Agency, Updated: 20 Jun, 2022 05:12 PM

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लखनऊ, 20 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश पुलिस ने सोमवार को दावा किया कि केन्द्र सरकार की 'अग्निपथ योजना' को लेकर 'भारत बंद' के आह्वान का राज्य में जनसामान्य पर कोई असर नहीं पड़ा है और इस योजना के विरोध में राज्य में प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं में अब...

लखनऊ, 20 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश पुलिस ने सोमवार को दावा किया कि केन्द्र सरकार की 'अग्निपथ योजना' को लेकर 'भारत बंद' के आह्वान का राज्य में जनसामान्य पर कोई असर नहीं पड़ा है और इस योजना के विरोध में राज्य में प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं में अब तक कुल 39 मुकदमे दर्ज किये गये हैं तथा 475 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
अपर पुलिस महानिदेशक (कानून—व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने सोमवार को बताया कि राज्य में अब तक कुल 39 मामले दर्ज किये गये हैं और कुल 475 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 330 को योजना के विरोध प्रदर्शन में गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार अब तक कुल 39 अभियोग पंजीकृत करते हुए 330 अराजकतत्वों को गंभीर धाराओं में गिरफ्तार किया गया है तथा सीआरपीसी की धारा 151 (किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सीआरपीसी की धारा 151 के तहत संदिग्ध व्यक्तियों की गिरफ्तारी की जाती है) के तहत 145 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया।
प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशांत कुमार ने कहा कि राज्य में सिविल पुलिस के अलावा 141 कंपनी पीएसी और दस कंपनी केंद्रीय पुलिस बल को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।

पुलिस मुख्यालय से जारी एक बयान के अनुसार सोशल मीडिया पर अग्निपथ योजना के विरोध में सोमवार को 'भारत बंद' के आह्वान संबंधी मैसेज वायरल हुए थे, जिसकी किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली थी, इसको ध्यान में रखते हुए पुलिस सुबह से ही कानून—व्यवस्था कायम करने के लिए सक्रिय थी।
बयान में कहा गया कि इस 'भारत बंद' के आह्वान का कोई असर जनसामान्य पर नहीं पड़ा है। पुलिस की सक्रियता के कारण सभी प्रतिष्ठान और बाजार रोज की भांति खुले रहे।

पुलिस के अनुसार 'अग्निपथ' योजना के विरोध में किये जा रहे प्रदर्शनों में जब तक प्रतियोगी छात्रों की सहभागिता रही, तब तक पुलिस द्वारा संवेदनशील रूप से यथोचित व्यवहार किया गया, लेकिन कुछ स्थानों पर अराजक तत्वों द्वारा कानून व्यवस्था को प्रभावित किये जाने के बाद संगीन धाराओं में अराजक तत्वों के खिलाफ मुकदमे कायम किये गये और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा कि भर्तियों के संबंध में जो कोचिंग संचालक हैं उन्हें सूचीबद्ध किया गया है और उनसे भी सहायता अपेक्षित है तथा बहुत से कोचिंग संचालकों ने पुलिस की मदद के लिए छात्रों से अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो कोचिंग संचालक लड़कों को भड़का रहे हैं, उनको गिरफ्तार किया जाएगा और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि जो कोई भी हिंसा में लिप्त पाया जाएगा या युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान की भरपाई उनसे ही की जाएगी।

अधिकारी ने कहा कि उप्र सरकार और पुलिस को यह विश्वास है कि जो योजना लाई गई है वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इसे लागू करने के लिए पूरे मनोयोग से प्रयत्न किया जा रहा है।

रविवार को गृह विभाग की ओर से जारी बयान के मुताबिक प्रदेश में 'अग्निपथ योजना' के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों के मामले में राज्य के 14 जिलों में कुल 34 मुकदमे दर्ज कर 387 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उप्र के विभिन्न जिलों में 16 जून को 'अग्निपथ' योजना के विरोध की शुरुआत हुई थी।


यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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