अयोध्या में मुस्लिम युवक ने अपनाया सनातन धर्म, कहा- 'अब शांति मिली, पहले था मन में डर'

Edited By Anil Kapoor,Updated: 28 Jun, 2025 12:33 PM

muslim youth adopted sanatan dharma in ayodhya

Ayodhya News: उत्तर प्रदेश के अयोध्या से एक अनोखी खबर सामने आई है। जहां एक मुस्लिम युवक ने अपनी मर्जी से सनातन धर्म अपना लिया है। उसने मंदिर में पूरी धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ दीक्षा ली और अब उसका नाम कृष्णा यादव रखा गया है। युवक का कहना है कि...

Ayodhya News: उत्तर प्रदेश के अयोध्या से एक अनोखी खबर सामने आई है। जहां एक मुस्लिम युवक ने अपनी मर्जी से सनातन धर्म अपना लिया है। उसने मंदिर में पूरी धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ दीक्षा ली और अब उसका नाम कृष्णा यादव रखा गया है। युवक का कहना है कि उसे सनातन धर्म की परंपराएं, पूजा-पाठ और इसकी संस्कृति बहुत सुंदर और आत्मा को छूने वाली लगीं, इसलिए उसने यह फैसला लिया।

कौन है यह युवक?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह युवक मूल रूप से थाना कैंट क्षेत्र के करमअली का पुरवा में किराए के मकान में रहता है और अयोध्या की एक मिठाई की दुकान में काम करता है। उसके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। उसकी बहन शबनम, अयोध्या की रायपुर रोड कोटसराय इलाके में रहती है।

क्यों अपनाया सनातन धर्म?
कृष्णा यादव (पहले मुस्लिम नाम से पहचाने जाते थे) ने बताया कि वह काफी समय से सनातन धर्म की परंपराओं और शिक्षाओं से प्रभावित थे। उनका कहना है कि मंदिरों में होने वाली आरती, धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या और पूजा-पाठ ने मेरे दिल को छू लिया। मुझे लगा कि यही सच्चा मार्ग है और इस धर्म में मुझे आत्मिक शांति मिली। उन्होंने कहा कि अब वह पूरी तरह से सनातन धर्म के अनुसार जीवन बिताएंगे और नियमित रूप से मंदिर जाकर पूजा-पाठ करेंगे।

धार्मिक दीक्षा कैसे हुई?
कृष्णा यादव ने भरतकुंड स्थित एक मंदिर में महंत परमात्मा दास के सान्निध्य में दीक्षा ली। इस मौके पर कई श्रद्धालु मौजूद थे। दीक्षा के समय उन्हें हनुमान चालीसा दी गई और प्रसाद भी दिया गया। महंत परमात्मा दास ने इस मौके पर कहा कि धर्म किसी जाति या संप्रदाय की सीमा में नहीं बंधा होता। यह आत्मा की आवाज है। कृष्णा ने सच्ची श्रद्धा से सनातन धर्म को अपनाया है और यह समाज को सकारात्मक संदेश देता है।

अब क्या करेगा कृष्णा यादव?
कृष्णा का कहना है कि वह अब सनातन धर्म के सिद्धांतों को अपनाकर जीवन जिएगा। मंदिरों में सेवा करेंगा, धार्मिक ग्रंथ पढ़ेंगा और हर दिन पूजा-पाठ करेंगा। उन्होंने कहा कि उन्हें अब एक नई पहचान मिली है और वह इससे बेहद खुश हैं।

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