Edited By Purnima Singh,Updated: 01 Aug, 2026 01:47 PM

लखनऊ के पुलिस आयुक्त का पदभार संभालने के दो दिन बाद तरुण गाबा शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के समक्ष पेश हुए। एक आपराधिक मामले में आवश्यक निर्देश समय पर दाखिल नहीं किए जाने पर अदालत ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का समन...
Lucknow News : लखनऊ के पुलिस आयुक्त का पदभार संभालने के दो दिन बाद तरुण गाबा शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के समक्ष पेश हुए। एक आपराधिक मामले में आवश्यक निर्देश समय पर दाखिल नहीं किए जाने पर अदालत ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का समन जारी किया था। पीठ ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश तब दिया था, जब स्थानीय पुलिस को दो अवसर दिए जाने के बावजूद वह मामले में आवश्यक निर्देश अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सकी थी।
अदालत को दिया भविष्य के लिए आश्वासन
अदालत के समक्ष पेश होकर पुलिस आयुक्त ने आश्वासन दिया कि भविष्य में सरकारी अधिवक्ता को समय पर आवश्यक निर्देश उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर जवाब दाखिल किया जा सके। न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ओम प्रकाश गुप्ता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
जांच रिपोर्ट में देरी का मामला
याचिका के अनुसार, बाजार खाला थाने में वर्ष 2025 में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक धमकी के आरोपों में दर्ज एक प्राथमिकी की जांच पूरी होने के बाद जांच अधिकारी ने सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बजाय उसे ''कानूनी राय'' के लिए भेज दिया, जिससे रिपोर्ट दाखिल करने में देरी हुई।
पीठ ने 23 जुलाई को यह जानना चाहा था कि किस कानूनी प्रावधान के तहत जांच रिपोर्ट को कानूनी राय के लिए भेजा गया। जब कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया और 27 जुलाई को भी स्थिति यथावत रही, तब अदालत ने पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का समन जारी किया।
आश्वासन के बाद याचिका का निस्तारण
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अपर शासकीय अधिवक्ता और पुलिस आयुक्त ने अदालत को बताया कि जांच रिपोर्ट में ''कानूनी राय'' का उल्लेख अनजाने में हो गया था। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से की जा रही है तथा भविष्य में ऐसी त्रुटि नहीं होगी। इस आश्वासन पर संतोष व्यक्त करते हुए याचिकाकर्ता ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई, जिसके बाद खंडपीठ ने याचिका का निस्तारण कर दिया।