Edited By Ramkesh,Updated: 18 Jul, 2026 07:13 PM

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की एक विशेष अदालत ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में उसके मामा को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। एक विशेष लोक अभियोजक ने शनिवार को यह जानकारी दी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, अदालत ने दोषी पर...
बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की एक विशेष अदालत ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में उसके मामा को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। एक विशेष लोक अभियोजक ने शनिवार को यह जानकारी दी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, अदालत ने दोषी पर 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
कोर्ट ने 20 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्मना
विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के विशेष न्यायाधीश नीरज कुमार गर्ग ने कुंवरगांव थाना क्षेत्र के निवासी आकाश को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने 1.70 लाख रुपये के जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया।
दिल्ली से पीड़िता हुई थी बरामद
वर्मा ने बताया कि 26 अक्टूबर 2024 को 16 वर्षीय लड़की के पिता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी और आरोप लगाया था कि उनकी बेटी रात के समय घर से लापता हो गयी थी। उन्होंने बताया कि प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पीड़िता को दिल्ली से बरामद किया। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि अदालत में दिए गए बयान में पीड़िता ने कहा कि वह गांव के सरकारी स्कूल में कक्षा पांच तक पढ़ी है।
आरोपी ने मंदिर में की थी शादी
उसने पुलिस को बताया कि 26 अक्टूबर 2024 की रात वह अपने मामा आकाश के साथ दिल्ली चली गई थी, जहां दोनों ने किराये का कमरा लिया। पीड़िता के अनुसार, दीपावली के दिन आकाश ने मंदिर में उससे शादी भी की। वर्मा ने बताया कि साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी नाबालिग भांजी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया, उससे शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई। उन्होंने बताया कि सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।