महंगे गैजेट और कारों ने बदली खरीदारों की पसंद, सेकेंड हैंड बाजार में रिकॉर्ड तेजी

Edited By Purnima Singh,Updated: 19 Jun, 2026 12:24 PM

shopping habits transformed by expensive new mobile phones and cars

नई कार और स्मार्टफोन खरीदना अब आम उपभोक्ताओं के लिए पहले जितना आसान नहीं रह गया है। लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों के बजट पर दबाव बढ़ाया है, जिसके चलते बड़ी संख्या में खरीदार अब पुराने लेकिन अच्छी स्थिति वाले उत्पादों की ओर रुख कर रहे हैं ...

नेशनल डेस्क : नई कार और स्मार्टफोन खरीदना अब आम उपभोक्ताओं के लिए पहले जितना आसान नहीं रह गया है। लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों के बजट पर दबाव बढ़ाया है, जिसके चलते बड़ी संख्या में खरीदार अब पुराने लेकिन अच्छी स्थिति वाले उत्पादों की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि देश में सेकेंड हैंड मोबाइल फोन और प्री-ओन्ड कारों का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और कई श्रेणियों में मांग नए उत्पादों की तुलना में अधिक गति से बढ़ रही है।

रीफर्बिश्ड डिवाइसों की हिस्सेदारी बढ़कर 26 प्रतिशत 
मोबाइल बाजार से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष जनवरी से मई के बीच बिकने वाले कुल स्मार्टफोनों में इस्तेमाल किए गए या रीफर्बिश्ड डिवाइसों की हिस्सेदारी बढ़कर 26 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 23 प्रतिशत था। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के बाद यह इस क्षेत्र की सबसे तेज वृद्धि मानी जा रही है।

पिछले कुछ महीनों में मेमोरी चिप्स की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई 
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में स्मार्टफोन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मेमोरी चिप्स की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डाटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण इन चिप्स की लागत कई गुना बढ़ी, जिसका सीधा असर मोबाइल फोन की कीमतों पर पड़ा। उद्योग से जुड़े लोगों का अनुमान है कि इस अवधि में हैंडसेट की कीमतों में औसतन 30 से 35 प्रतिशत तक वृद्धि हुई, जबकि कुछ मॉडल पहले की तुलना में काफी अधिक महंगे हो गए हैं।

10000 से कम कीमत वाले कई 4जी स्मार्टफोन बाजार से गायब 
मोबाइल उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि लगातार मूल्य वृद्धि के कारण 10 हजार रुपये से कम कीमत वाले कई 4जी स्मार्टफोन बाजार से लगभग गायब हो गए हैं। छोटे शहरों और कस्बों में भले ही उपभोक्ता वित्तपोषण की सुविधा उपलब्ध हो, लेकिन कर्ज देने वाली संस्थाओं द्वारा नियम सख्त किए जाने के कारण हर खरीदार इसके लिए पात्र नहीं बन पा रहा है। ऐसे में सीमित बजट वाले ग्राहक सेकेंड हैंड स्मार्टफोन को बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

विश्लेषकों का क्या कहना है ? 
बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि इस वर्ष पुरानी स्मार्टफोन श्रेणी में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की जा सकती है, जबकि नए स्मार्टफोन की बिक्री में गिरावट देखने को मिल सकती है। उपभोक्ताओं का झुकाव ऐसे उपकरणों की ओर बढ़ रहा है जो कम कीमत में बेहतर फीचर्स उपलब्ध कराते हैं। अनुमान है कि इस वर्ष भारत में नए और पुराने दोनों तरह के मोबाइल उपकरणों की कुल बिक्री लगभग 19 करोड़ यूनिट के आसपास रह सकती है।

2026 में नई कारों की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हुई 
उधर, ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी यही रुझान देखने को मिल रहा है। इस साल नई कारों की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हुई है, जिससे वाहन खरीदना पहले की तुलना में महंगा हो गया है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में ग्राहक अब प्रमाणित पुरानी कारों की तलाश कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में देश में पुरानी कारों की बिक्री बढ़कर 61 लाख यूनिट तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 56 लाख यूनिट था। इसी अवधि में नई कारों की बिक्री 46.4 लाख यूनिट के स्तर पर रही।

ऑटो सेक्टर के जानकारों का कहना है कि नई कारों की बढ़ती लागत और नियामकीय बदलावों ने ग्राहकों को वैकल्पिक विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है। अच्छी स्थिति में उपलब्ध प्रमाणित पुरानी कारें कम कीमत में बेहतर मूल्य प्रदान कर रही हैं, जिससे उनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

दिलचस्प बात यह है कि पुरानी कारों की मांग का सबसे बड़ा हिस्सा महानगरों और बड़े शहरी बाजारों से आ रहा है। कुल बिक्री में दो-तिहाई से अधिक योगदान बड़े शहरों का है। खरीदार अब केवल छोटी हैचबैक कारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बेहतर सुविधाओं वाले मॉडल और एसयूवी वाहनों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे साफ है कि बढ़ती महंगाई और ऊंची कीमतों के दौर में सेकेंड हैंड बाजार अब मजबूरी नहीं, बल्कि एक समझदारी भरा विकल्प बनता जा रहा है।

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