Edited By Anil Kapoor,Updated: 10 Jun, 2026 07:04 AM

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वर्ष 2005 के बहुचर्चित बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड में दोषसिद्ध आरोपी आबिद को जमानत दे दी है और उसकी आपराधिक अपील के निस्तारण तक उसकी सजा निलंबित कर दी है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की...
Prayagraj News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वर्ष 2005 के बहुचर्चित बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड में दोषसिद्ध आरोपी आबिद को जमानत दे दी है और उसकी आपराधिक अपील के निस्तारण तक उसकी सजा निलंबित कर दी है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2024 से लंबित आपराधिक अपील पर निकट भविष्य में सुनवाई होने की संभावना नहीं है। इसलिए अपील पर अंतिम निर्णय होने तक आबिद को जमानत पर रिहा किया जा सकता है।
FIR में नाम गायब, न कोई बरामदगी और न ही हुई शिनाख्त
आबिद की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि उसके मुवक्किल का नाम मूल प्राथमिकी में दर्ज नहीं था और उसके खिलाफ कार्रवाई केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर शुरू की गई थी। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामले में कोई पहचान परेड नहीं कराई गई और आबिद के कब्जे से कोई आपत्तिजनक या दोष सिद्ध करने वाली सामग्री भी बरामद नहीं हुई।
केवल सह-आरोपियों के बयान पर कार्रवाई
अदालत ने कहा कि जब स्थानीय पुलिस द्वारा दाखिल आरोपपत्र के आधार पर गवाहों के बयान दर्ज किए गए, तब कथित प्रत्यक्षदर्शियों में से किसी ने भी अपीलकर्ता को हमलावरों में शामिल व्यक्ति के रूप में नहीं पहचाना। खंडपीठ ने 29 मई के अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष ने जांच के दौरान किसी भी स्तर पर पहचान परेड नहीं कराई। साथ ही, अपीलकर्ता का नाम प्रथम सूचना रिपोर्ट में नहीं था और उसका नाम केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर सामने आया है।
25 जनवरी 2005 को राजू पाल की गोली मारकर हत्या
राजू पाल, उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक थे। 25 जनवरी 2005 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह हत्या कथित तौर पर प्रयागराज पश्चिम विधानसभा सीट के 2004 के उपचुनाव में अतीक अहमद के भाई अशरफ को हराने के बाद राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते की गई थी।