जब प्रेमानंद महाराज की दिवाली होती थी बिना दीप और बिना भोजन... सुनाया हैरान करने वाला किस्सा

Edited By Mamta Yadav,Updated: 20 Oct, 2025 09:12 PM

when premanand maharaj celebrated diwali without lamps and without food he re

दिवाली जैसे खुशी और रौशनी के पर्व पर भी कभी भूखे रहना पड़ा था – ये भावुक किस्सा सुनाकर संत प्रेमानंद महाराज ने हजारों लोगों को भावुक कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में संत महाराज अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि कैसे...

Mathura News: दिवाली जैसे खुशी और रौशनी के पर्व पर भी कभी भूखे रहना पड़ा था – ये भावुक किस्सा सुनाकर संत प्रेमानंद महाराज ने हजारों लोगों को भावुक कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में संत महाराज अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि कैसे कभी दिवाली उनके लिए आंसुओं से भरा दिन होता था।

संत प्रेमानंद की भावुक दिवाली
यह वीडियो श्री राधा केली कुंज आश्रम के आधिकारिक यूट्यूब चैनल भजन मार्ग पर प्रसारित किया गया है। इसमें प्रेमानंद महाराज भावुक होकर बताते हैं कि कैसे उन्होंने अपनी दिवाली भूखे पेट और बिना साधनों के बिताई। "हम रोटी मांगने जाते थे, तो लोग कहते थे – आज त्योहार है, रोटी बनी ही नहीं है।" उन्होंने बताया कि दीपावली की रात जब हर घर में दीप जलते थे, तब वे अंधेरे में अपने इष्ट श्रीजी को गोद में लेकर बैठते थे और बस यही कहते – “हे ठाकुर, ये आंसू ही आपकी दिवाली है।” महाराज ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले भक्ति, प्रेम और साधु-संग की दीपावली होती थी, जिसमें बाहरी सजावट नहीं बल्कि आंतरिक शुद्धता और समर्पण का उजाला होता था।

अब बदल चुका है समय
अब प्रेमानंद महाराज के साथ दिवाली मनाने के लिए हजारों श्रद्धालु मथुरा स्थित श्री राधा केली कुंज आश्रम पहुंचते हैं। बीते रविवार को भी दिवाली के अवसर पर भारी भीड़ ने आश्रम में पहुंचकर उनके प्रवचनों और दर्शन का लाभ लिया। महाराज के अनुसार, दिवाली केवल बाहरी सजावट का नाम नहीं, बल्कि आंतरिक प्रेम, भक्ति और त्याग की भावना से जुड़ा पर्व है।

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