इटावा का ऐतिहासिक कालिका देवी मंदिर...जहां केवल दलित होते हैं मंदिर के पुजारी

Edited By Moulshree Tripathi,Updated: 22 Oct, 2020 05:08 PM

kalika devi temple in etawah where dalits are temple servants

उत्तर प्रदेश के इटावा में कभी स्वर्णनगरी के रूप में विख्यात रहे लखना कस्बे के ऐतिहासिक कालिका देवी मंदिर में दलित पुजारी की तैनाती के कारण देश में दलित चेतना की अलख जगाता...

इटावा:  उत्तर प्रदेश के इटावा में कभी स्वर्णनगरी के रूप में विख्यात रहे लखना कस्बे के ऐतिहासिक कालिका देवी मंदिर में दलित पुजारी की तैनाती के कारण देश में दलित चेतना की अलख जगाता हुआ दिख रहा है। मंदिर के मुख्य प्रबंधक रवि शंकर शुक्ला ने गुरूवार को बताया कि मंदिर के प्रांरभकाल से दलितों को सम्मान देने के लिहाज से मंदिर का सेवक हमेशा से दलित को बनाये जाने की व्यवस्था की गई है।

पुराने किस्सों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि राजा ने जब देखा कि दलितों को समाज में सम्मान नहीं दिया जाता तो ऐलान किया था कि इस मंदिर का सेवक दलित ही होगा। तब से आज तक उसी दलित परिवार के सदस्य मंदिर की सेवा में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर के पुजारी अशोक दोहरे व अखिलेश दोहरे के पूर्वज महामाया भगवती देवी की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। इस मंदिर के प्रांगण में एक ओर जहां मंदिर में काली माता विराजती हैं तो वहीं उसी आंगन में स्थित सैयद पीर बाबा की दरगाह है, जो सांप्रदायिक एकता व सौहार्द की मिसाल है। उनके मजार पर चादर, कौड़ियां एवं बताशा चढ़ाया जाता है। 

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