Edited By Anil Kapoor,Updated: 08 May, 2026 02:20 PM

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में फर्जी कंपनियों, नकली दस्तावेजों और 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के कथित हवाला लेन-देन के एक विस्तृत नेटवर्क के मुख्य संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी महफूज अली उर्फ...
Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में फर्जी कंपनियों, नकली दस्तावेजों और 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के कथित हवाला लेन-देन के एक विस्तृत नेटवर्क के मुख्य संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी को चकेरी पुलिस, साइबर प्रकोष्ठ और सर्विलांस यूनिट की संयुक्त टीम ने पकड़ा। पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई साल की शुरुआत में शहर के श्याम नगर क्षेत्र में हुई एक डकैती के मामले की जांच के दौरान की गई।
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पुलिस के अनुसार, 16 फरवरी को नकदी ले जाने वाले 2 लोगों को मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने लूट लिया। हालांकि शुरुआत में पीड़ितों ने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई। पुलिस ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया और बाद में 6 आरोपियों को गिरफ्तार करके लगभग 11 लाख रुपए नकदी बरामद की गई। जांच के दौरान, पुलिस ने कथित रूप से अली से जुड़े मुखौटा कंपनियों के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। अली जजमऊ का निवासी है और कबाड़ व मांस व्यापार करता है।
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कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि गरीब और भोलेभाले लोगों की पहचान और दस्तावेजों का दुरुपयोग करके फर्जी कंपनियां बनाई गईं, जीएसटी पंजीकरण कराया गया और कई राज्यों में बैंक खाते खोले गए। लाल ने कहा कि आरोपी और उनके सहयोगियों ने लोगों को ऋण, बीमा योजनाओं और वित्तीय सहायता का झांसा देकर फंसाया। उन्होंने आधार और पैन विवरण जुटाए और उनका इस्तेमाल नकली कंपनियों को चलाने व भारी वित्तीय लेन-देन में किया।
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पुलिस ने कहा कि पेंटर निखिल कुमार ने लगभग 2 हफ्ते पहले शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया कि उनके नाम पर एक फर्जी सिम कार्ड और जीएसटी पंजीकरण करके रवि एंटरप्राइजेज नाम की कंपनी बनाई गई और 6 महीने में खाते के माध्यम से 7.75 करोड़ रुपए के लेन-देन हुए। जांचकर्ताओं ने कई अन्य कथित मुखौटा कंपनियों की पहचान भी की, जिनमें मां विंध्यवासिनी एंटरप्राइजेज, आरती एंटरप्राइजेज, राजा एंटरप्राइजेज और अफीफा एंटरप्राइजेज शामिल हैं। इन कंपनियों के माध्यम से करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ। केवल एक मामले में लगभग 146 करोड़ रुपए का लेनदेन होने का अनुमान है।