यूपी पुलिस हेड कॉन्स्टेबल प्रमोशन परीक्षा में नकल का आरोप, HC ने 176 अभ्यर्थियों का पूरा रिजल्ट तलब किया

Edited By Ramkesh,Updated: 12 Aug, 2026 09:11 PM

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड को हेड कॉन्स्टेबल (मोटर परिवहन) पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित विभागीय परीक्षा में शामिल सभी 176 अभ्यर्थियों के पूर्ण परिणाम अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।...

लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड को हेड कॉन्स्टेबल (मोटर परिवहन) पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित विभागीय परीक्षा में शामिल सभी 176 अभ्यर्थियों के पूर्ण परिणाम अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर नकल और अनियमितता के आरोपों के बीच दिया गया है। 

विभागीय परीक्षा को दी गई थी चुनौती
न्यायमूर्ति राजीव सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने बोर्ड को चयनित अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था का विवरण भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी। पीठ ने ये निर्देश कॉन्स्टेबल वाहन चालकों की ओर से दायर याचिका पर दिए हैं। याचिकाकर्ताओं ने हेड कॉन्स्टेबल (मोटर परिवहन) पद पर पदोन्नति के लिए पांच अक्टूबर 2025 को आयोजित विभागीय परीक्षा को चुनौती दी है। 

बोर्ड की वेबसाइट पर पूरी तरह रिजल्ट उपलब्ध नहीं थे
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि परीक्षा में नकल के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। उन्होंने परीक्षा रद्द कर कड़ी निगरानी में दोबारा परीक्षा कराने की मांग की है। उन्होंने बाद में घोषित परिणामों और प्रैक्टिकल/तकनीकी दक्षता परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों के चयन की प्रक्रिया को भी चुनौती दी है। अदालत के आदेश पर पेश हुई उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अपर पुलिस अधीक्षक मोहिनी पाठक ने बताया कि परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए गए थे, लेकिन वे बोर्ड की वेबसाइट पर पूरी तरह उपलब्ध नहीं थे।

मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पाए गए थे अभ्यर्थी
उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी अपने परिणाम स्वयं देख सकते थे। अधिकारियों ने शुरुआत में अदालत को बताया था कि केवल दो अभ्यर्थी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पाए गए थे और अन्य अभ्यर्थियों के पास कोई अनधिकृत वस्तु नहीं मिली थी। हालांकि, अदालत के निर्देश के बाद की गई जांच में अलग तस्वीर सामने आई। 22 जुलाई को पाठक ने अदालत को बताया था कि 115 अभ्यर्थी अनियमितता में शामिल पाए गए और उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। अदालत ने विवाद के निपटारे में मदद के लिए परीक्षा की रिकॉर्डिंग की जांच करने का भी निर्देश दिया है।

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