उत्तराखंड में 5 पर्यटकों की मौत के साथ 65 हुई मृतकों की संख्या... 7 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान

Edited By Nitika,Updated: 22 Oct, 2021 11:10 AM

death toll rises to 65 in uttarakhand

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के कापकोट में पांच पर्यटकों की मौत होने के साथ ही बारिश की आपदा से जूझ रहे राज्य में वर्षा जनित आपदा में मरने वालों की संख्या गुरुवार को 65 हो गई। वहीं राज्य सरकार ने बारिश के कारण राज्य को 7,000 करोड़ रुपए का नुकसान होने...

 

देहरादूनः उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के कापकोट में पांच पर्यटकों की मौत होने के साथ ही बारिश की आपदा से जूझ रहे राज्य में वर्षा जनित आपदा में मरने वालों की संख्या गुरुवार को 65 हो गई। वहीं राज्य सरकार ने बारिश के कारण राज्य को 7,000 करोड़ रुपए का नुकसान होने की बात कही है।

बागेश्वर जिले में कपकोट के पास सुन्दरधुंगा ग्लेशियर (हिमनद) के पास फंसे पर्यटकों की मृत्यु की पुष्टि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के राज्य के दौरे के दिन ही हुई है। शाह राज्य में बाढ़ से हुए नुकसान का हवाई सर्वेक्षण करने आए। राज्य सरकार ने इस त्रासदी में 7,000 करोड़ रुपए के नुकसान का दावा किया है। दिन में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार 60 लोगों की मौत हुई थी, 5 पर्यटकों के मृत्यु की सूचना देर शाम आई है। सबसे ज्यादा 28 लोगों की मौत नैनीताल जिले में हुई है। अधिकारियों ने बताया कि पांच पर्यटकों की मौत हुई है जबकि एक लापता है। वहीं 4 पर्यटकों को सुरक्षित निकालने में कामयाबी मिली है।

अधिकारियों ने बताया कि बागेश्वर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में करीब 65 पर्यटक फंसे हुए थे और अभी भी वहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव दल प्रयास कर रहे हैं। कुमाऊं क्षेत्र में प्रभावित इलाकों का सर्वेक्षण कर जॉलीग्रांट हवाई अड्डा लौटने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों के सतर्क रहने की वजह से नुकसान को कम करने में मदद मिली। वहीं, सर्वाधिक प्रभावित कुमाऊं क्षेत्र में संपर्क बहाल करने और संवेदनशील इलाकों से लोगों को बाहर निकालने के प्रयासों के बीच राहत एव बचाव कार्य जारी है। इससे पहले, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में रविवार की रात से शुरू होकर तीन दिन तक लगातार हुई बारिश से 7,000 करोड़ रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के नेटवर्क को बहाल करना तथा फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना इस समय प्राथमिकता है।

गृह मंत्री ने कहा कि भारी बारिश का अलर्ट बहुत पहले जारी कर दिया गया था और इसके मद्देनजर चारधाम यात्रा रोकने समेत अन्य एहतियाती कदम उठाने में मदद मिली। उन्होंने कहा, ‘‘अगर ऐसा नहीं किया गया होता तो और क्षति हो सकती थी। समय पर तलाश एवं बचाव दलों को काम पर लगाने और बचाव अभियान में भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर के शामिल होने की वजह से संभावित क्षति को कम करने में मदद मिली।'' हालांकि, उन्होंने उत्तराखंड के लिए तत्काल किसी राहत पैकेज की घोषणा नहीं की और कहा कि नुकसान का विस्तृत आकलन करने की जरुरत है। शाह ने कहा कि राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे के मद्देनजर 250 करोड़ रुपए की राशि पहले ही दी जा चुकी है और इससे फिलहाल राहत एवं बचाव कार्यों के खर्च की पूर्ति हो सकती है। शाह ने कहा कि केंद्र राज्य सरकार के साथ है और वह इसके पुनर्वास कार्यों में सभी तरह की सहायता मुहैया कराएगा। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में सभी बंद सड़कों को साफ कर लिया गया है, सिर्फ 3 सड़कें अभी इस्तेमाल के लायक नहीं है क्योंकि उनमें 25 मीटर चौड़ी दरार पड़ गई है। गृहमंत्री ने कहा कि प्रभावित इलाकों में 80 फीसदी टेलिफोन संपर्क को बहाल कर दिया गया और 60 फीसदी बिजली उपलब्धता अब तक सुनिश्चित की जा चुकी है। बाकी कमी को भी जल्द ही दूर कर दिया जाएगा।

हवाई सर्वेक्षण करने के बाद शाह ने राज्य के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक के दौरान उत्तराखंड सरकार को महामारी के प्रसार की रोकथाम के मद्देनजर चिकित्सा दलों को प्रभावित इलाकों में भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त हुए बिजली के तारों की मरम्मत करने की जरुरत है और राज्य में मूसलाधार बारिश की समस्या के दौरान केन्द्रीय और राज्य की एजेंसियों बीच दिखे समन्वय को आगे भी जारी रखना चाहिए। गृह मंत्री ने राज्य में बेहतर आपदा प्रबंधन के संबंध में भी राज्य सरकार से सुझाव मांगा। उन्होंने कहा कि अब तक 3,500 लोगों को बचाया गया है और 16,000 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 17 टीम, राज्य आपदा प्रतिवादन बल की सात टीम, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी की 15 टीम और पुलिस के 5,000 कर्मी राज्य में राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं। शाह के प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने के दौरान उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट और राज्य आपदा प्रबंधन मंत्री धन सिंह रावत भी मौजूद रहे।

नैनीताल के जिला अधिकारी धीरज गर्बियाल ने बताया कि भारी बारिश और नैनी झील के उफनने की वजह से नैनीताल के धोबी घाट इलाके के आसपास भूस्खलन की घटनाएं हुईं। यह क्षेत्र नैनीताल के ठीक आधार पर स्थित है और इसे शहर की बुनियाद माना जाता है। धोबी घाट में रहने वाले लगभग 100 परिवारों को स्थानांतरित कर दिया गया। गर्बियाल ने बताया कि कई स्थानों पर राहत शिविर तैयार किए गए हैं। उन्होंने बताया कि रामनगर में 25 लोगों को हवाई मार्ग से निकाला गया जबकि छह को राफ्ट की मदद से निकाला गया। सुंदरखाल और रामनगर के 30 परिवारों को हवाई मार्ग से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित पुचड़ी इलाके में राहत शिविर बनाए गए हैं। पुचड़ी नई बस्ती में रहने वाले 10 परिवारों के 54 लोगों को राजकीय बालिका प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए राहत शिविर में ठहराया गया है। उन्होंने बताया कि 150 लोगों को रोडवेज बसों में सुरक्षित रामनगर लाया गया और उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया, जबकि लालकुआं में बाढ़ से प्रभावित 97 परिवारों को एक गुरुद्वारा और राहत शिविर में स्थानांतरित कर दिया गया।

उत्तराखंड में भारी बारिश की वजह से अस्थायी तौर पर रोकी गई चारधाम यात्रा भी बहाल हो गई। इस बीच, मूसलाधार बारिश के अनुमान और मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट के मद्देनजर 18 अक्टूबर को अस्थाई रूप से रोकी गई चारधाम यात्रा फिर से शुरू हो गयी है। श्रद्धालु ऋषिकेश चारधाम बस टर्मिनल और हरिद्वार बस स्टैंड से केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए रवाना होने लगे हैं। केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू हो गई है। वहां मौसम काफी ठंडा है लेकिन वहां बारिश नहीं हो रही है।

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