दिगंबर जैन मंदिरों में प्रवेश से पहले जानें नियम, महिलाओं के लिए नई गाइडलाइन जारी

Edited By Ramkesh,Updated: 30 Apr, 2026 12:31 PM

learn the rules before entering digambar jain temples new guidelines have been

जिले के बड़ा गांव स्थित एक दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धालुओं से शालीन वस्त्र पहनने की अपील की गई है और इस संबंध में एक बोर्ड लगाया गया है। मंदिर प्रबंधन द्वारा लगाए गए बोर्ड के जरिये श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि मंदिर में प्रवेश करते समय हाफ पैंट,...

बागपत: जिले के बड़ा गांव स्थित एक दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धालुओं से शालीन वस्त्र पहनने की अपील की गई है और इस संबंध में एक बोर्ड लगाया गया है। मंदिर प्रबंधन द्वारा लगाए गए बोर्ड के जरिये श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि मंदिर में प्रवेश करते समय हाफ पैंट, बरमूडा, मिनी स्कर्ट और जींस-टॉप जैसे छोटे या आधुनिक पश्चिमी परिधान पहनकर न आएं।

 बोर्ड पर लिखी अपील में यह भी कहा गया है कि महिलाएं और बालिकाएं शालीन वस्त्र पहनें तथा सिर ढककर ही मंदिर परिसर में प्रवेश करें। मंदिर प्रबंधन समिति के मंत्री अंकुश जैन ने बताया कि यह पहल धार्मिक स्थल की गरिमा और पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है और इसका मकसद किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर रोक लगाना नहीं है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय मंदिर समिति द्वारा श्रद्धा और अनुशासन की भावना को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है।

 मंदिर के प्रबंधक प्रभात जैन ने बृहस्पतिवार को 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि मंदिर में बोर्ड लगाने के साथ ही उस पर लिखे निर्देशों का अनुपालन भी कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आधुनिक पश्चिमी परिधान पहनकर आने वाली महिलाओं और बालिकाओं से शालीन वस्त्र पहनकर तथा सिर ढककर ही मंदिर परिसर में प्रवेश करने का अनुरोध किया जा रहा है। 

मंदिर में दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। कई श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं, ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर शालीनता बनाए रखना भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है। उल्लेखनीय है कि बागपत का यह मंदिर दिगंबर जैन परंपरा का एक प्रमुख केंद्र है, जहां भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा स्थापित है और इसे एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थल माना जाता है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि बदलती जीवनशैली के बीच ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देने और नई पीढ़ी को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने में सहायक हो सकते हैं।
 

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