'इनोवेट इन यूपी, स्केल फॉर द वर्ल्ड' के विजन के साथ यूपी बनेगा देश का डीप टेक कैपिटल: सीएम योगी

Edited By Pooja Gill,Updated: 11 Apr, 2026 09:37 AM

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि 'इनोवेट इन यूपी, स्केल फॉर द वर्ल्ड' के विजन के तहत प्रदेश को देश का 'डीप...

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि 'इनोवेट इन यूपी, स्केल फॉर द वर्ल्ड' के विजन के तहत प्रदेश को देश का 'डीप टेक कैपिटल' बनाने के लिए ठोस, परिणामोन्मुखी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। बयान में कहा गया कि उन्होंने कृत्रिम मेधा, 'क्वांटम कंप्यूटिंग', 'ड्रोन टेक्नोलॉजी','ग्रीन हाइड्रोजन', 'साइबर सिक्योरिटी' और 'मेड-टेक' जैसे उभरते क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश को अग्रणी बनाने पर बल दिया। 

सीएम योगी ने दिए ये निर्देश 
योगी ने शोध और उद्योग के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए, ताकि नवाचारों का बड़े स्तर पर व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित हो और रोजगार सृजन को गति मिले। बैठक में आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मनींद्र अग्रवाल द्वारा विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। बताया गया कि 'मेड-टेक' के क्षेत्र में 'गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी' के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अभिनव तकनीकी समाधान विकसित किए जा रहे हैं तथा इस संबंध में प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा विभाग को प्रेषित किया जा चुका है। यह संस्थान नवंबर में प्रारम्भ होना प्रस्तावित है। 

सीएम ने ये भी कहा...
मुख्यमंत्री ने 'ग्रीन हाइड्रोजन' के क्षेत्र में प्रस्तावित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' को प्रदेश के ऊर्जा भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उत्पादन, भंडारण, परीक्षण, सुरक्षा मानकों एवं औद्योगिक उपयोग के सभी आयामों पर तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में आयुर्वेद के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 'क्लिनिकल वैलिडेशन' हेतु देश के पहला संस्थागत केंद्र स्थापित करने पर भी विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से आयुर्वेदिक औषधियों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, शोध आधार निर्माण, प्रयोगशाला विकास तथा हर्बल संसाधनों के संरक्षण एवं उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी। 

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