Edited By Purnima Singh,Updated: 15 May, 2026 02:06 PM

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) के एक प्रवक्ता द्वारा ब्राह्मण समाज पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सपा नेतृत्व की खामोशी पर सवाल उठाते हुए शुक्रवार को...
लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) के एक प्रवक्ता द्वारा ब्राह्मण समाज पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सपा नेतृत्व की खामोशी पर सवाल उठाते हुए शुक्रवार को कहा कि इस चुप्पी से मामला और अधिक गंभीर होता जा रहा है। मायावती ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ''सपा के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा हाल में ब्राह्मण समाज को लेकर की गई अभद्र, अशोभनीय और आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर हर तरफ भारी आक्रोश है और उसकी तीव्र निंदा होना स्वाभाविक है।''
उन्होंने कहा, ''इस विवाद के बाद पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के बावजूद मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली सपा के नेतृत्व की इस मुद्दे पर खामोशी से मामला और अधिक तूल पकड़ता जा रहा है। स्थिति भी तनावपूर्ण होती जा रही है।'' बसपा प्रमुख ने कहा, ''सपा प्रवक्ता के गैर-जिम्मेदाराना बयान से ब्राह्मण समाज के आदर-सम्मान और स्वाभिमान को ठेस पहुंची है। ऐसे में सपा मुखिया को इसका तत्काल संज्ञान लेते हुए ब्राह्मण समाज से माफी मांगनी चाहिए और पश्चाताप करना चाहिए।''
उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण से यह भी साबित होता है कि सपा का ''जातिवादी चाल-चरित्र'' नहीं बदला है और दलितों, अति पिछड़ों तथा मुस्लिम समाज की तरह ब्राह्मण समाज के प्रति भी उसका रवैया विरोधी बना हुआ है। मायावती ने कहा, ''ब्राह्मण समाज के प्रति वर्तमान सरकार के रवैये को लेकर भी इस समाज में जबरदस्त नाराजगी है, जो किसी से छिपी नहीं है।'' उन्होंने दावा किया कि बसपा ने सर्वसमाज के साथ-साथ ब्राह्मण समाज को भी पार्टी और सरकार में भरपूर सम्मान और उचित भागीदारी दी है। उन्होंने कहा, ''बसपा में 'इस्तेमाल करो और फिर बाहर करो' की राजनीति नहीं है, बल्कि सर्वसमाज का हित हमेशा सुरक्षित रहा है।''