Edited By Radhika,Updated: 06 Jun, 2026 09:57 AM

बिहार की राजनीति में एक बार फिर गरमागरमी बढ़ गई है। राज्य सरकार द्वारा ज़ेड-प्लस (Z-Plus) सुरक्षा कवर हटाए जाने के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने एक कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने पटना के '10 सर्कुलर रोड' स्थित अपने सरकारी...
नेशनल डेस्क: बिहार की राजनीति में एक बार फिर गरमागरमी बढ़ गई है। राज्य सरकार द्वारा ज़ेड-प्लस (Z-Plus) सुरक्षा कवर हटाए जाने के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने एक कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने पटना के '10 सर्कुलर रोड' स्थित अपने सरकारी आवास के बाहर तैनात नए सुरक्षा प्रोटोकॉल के सभी बचे हुए जवानों को वापस भेज दिया है। यह कदम सरकार के उस फैसले के ठीक बाद आया है, जिसमें लालू परिवार को बंगला खाली करने का निर्देश दिया गया है।
10 सर्कुलर रोड को लेकर तकरार पर 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया
बिहार सरकार ने 10 सर्कुलर रोड स्थित इस बंगले को अब राज्य के पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है। सरकार के नोटिस के मुताबिक राबड़ी देवी को बिहार विधान परिषद में विपक्ष की नेता के तौर पर पहले ही हार्डिंग रोड पर एक वैकल्पिक सरकारी आवास दिया जा चुका है, लेकिन वे अभी तक वहां शिफ्ट नहीं हुई हैं। नीतीश-सम्राट सरकार ने लालू परिवार को यह बंगला खाली करने के लिए 15 जून के मध्य तक (15 दिनों की मोहलत) का समय दिया है।
इस नोटिस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राबड़ी देवी ने मीडिया से कहा कि वे जगह खाली कराने के लिए बल (पुलिस फ़ोर्स) बुला सकते हैं, लेकिन मैं यह जगह खाली नहीं करूंगी। इस पूरे विवाद पर शेखपुरा में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आरजेडी नेतृत्व पर परोक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आवास जनता का होता है। इसे किसी की व्यक्तिगत जागीर या पैतृक संपत्ति नहीं माना जा सकता। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि कार्यकाल समाप्त होने के महज 24 घंटे के भीतर वे खुद सरकारी आवास खाली कर देते हैं। सरकारी घर सिर्फ आधिकारिक उपयोग के लिए होते हैं।
क्यों खास है '10 सर्कुलर रोड'?
यह बंगला दशकों से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का मुख्य सियासी केंद्र रहा है। राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री रहते हुए इसी आवास से सरकार चलाई थी, जिसके कारण इस पते का लालू परिवार और आरजेडी समर्थकों के लिए बड़ा राजनीतिक और भावनात्मक महत्व है। अब देखना यह है कि जून के मध्य में अल्टीमेटम खत्म होने के बाद यह विवाद क्या नया मोड़ लेता है।