Edited By Anil Kapoor,Updated: 09 Apr, 2026 11:36 AM

Kanpur News: उत्तर प्रदेश के चर्चित अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल से पुलिस ने जेल के भीतर मंगलवार को मैराथन पूछताछ की। पांच घंटे तक चली इस कड़ी पूछताछ में पुलिस ने 50 से अधिक सवालों की बौछार की, जिसके बाद आरोपी ने इस काले...
Kanpur News: उत्तर प्रदेश के चर्चित अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल से पुलिस ने जेल के भीतर मंगलवार को मैराथन पूछताछ की। पांच घंटे तक चली इस कड़ी पूछताछ में पुलिस ने 50 से अधिक सवालों की बौछार की, जिसके बाद आरोपी ने इस काले कारोबार के कई चौंकाने वाले राज खोल दिए हैं।
पूछताछ में हुए बड़े खुलासे
शिवम अग्रवाल ने पुलिस के सामने कबूल किया है कि वह अब तक 6 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट खुद करवा चुका है। हालांकि, पुलिस सूत्रों का दावा है कि आरोपी के नेटवर्क के जरिए कानपुर में अब तक 40 से अधिक अवैध ट्रांसप्लांट किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोपी के बयान के आधार पर 16 बड़े डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं। साथ ही 10 से ज्यादा नर्सिंग होम और अस्पतालों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रिया अस्पताल और अहूजा अस्पताल जैसे संस्थानों में नियमों को ताक पर रखकर अवैध तरीके से किडनी बदली जाती थी। यह रैकेट सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार दिल्ली और उत्तराखंड तक भी जुड़े हुए हैं।
10 लाख में सौदा, 1 करोड़ में वसूली
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह गरीब युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपना शिकार बनाता था। किडनी देने वाले को महज 8 से 10 लाख रुपए का लालच दिया जाता था। वहीं, जिसे किडनी की जरूरत होती थी, उस मरीज से यह गिरोह 60 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपए तक वसूलता था।
पुलिस की छापेमारी और नई टीमें
शिवम अग्रवाल के खुलासे के बाद पुलिस कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 विशेष टीमें गठित की हैं। ये टीमें यूपी के अन्य जिलों के साथ-साथ दिल्ली और उत्तराखंड में भी छापेमारी कर रही हैं। मार्च में इस रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद से ही पुलिस लगातार साक्ष्य जुटा रही थी, जिसमें अब कई महत्वपूर्ण वीडियो और चैट भी हाथ लगे हैं।
फर्जी डॉक्टर बनकर जाल बिछाता था शिवम
बता दें कि शिवम अग्रवाल खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को गुमराह करता था। वह अस्पतालों के साथ सांठगांठ कर डोनर्स और मरीजों के बीच कड़ी का काम करता था। मार्च के अंत में कल्यानपुर-रावतपुर क्षेत्र के निजी अस्पतालों पर हुई छापेमारी के बाद से ही इस रैकेट की परतों का खुलना जारी है।