जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, कैश विवाद के बाद महाभियोग की थी तैयारी

Edited By Ramkesh,Updated: 10 Apr, 2026 12:58 PM

justice yashwant verma has resigned sparking a stir amid the cash controversy

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उनके इस कदम से न्यायिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आप को बता दें कि उनके आधिकारिक आवास पर कथित रूप से नकदी मिलने के मामले के बाद विवाद खड़ा हो गया था। इसी विवाद...

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उनके इस कदम से न्यायिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आप को बता दें कि उनके आधिकारिक आवास पर कथित रूप से नकदी मिलने के मामले के बाद विवाद खड़ा हो गया था। इसी विवाद के बीच उनका तबादला दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था।

फिलहाल उनके खिलाफ लगे आरोपों को लेकर आंतरिक जांच प्रक्रिया जारी है। सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए संसद के माध्यम से उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती थी। ऐसे में उनके इस्तीफे को इस पूरे विवाद के बीच एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। न्यायिक व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी इस मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

आप को बता दें कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को पद से हटाने के कई सांसदों के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने एक प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्तावा को विचारार्थ स्वीकार कर लिया और उनके खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की और इसके साथ ही न्यायमूर्ति वर्मा पर महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। हालांकि वार्मा ने महाभियोग की कार्रवाई से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 

यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की चल रही थी आंतरिक जांच 
लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश पर न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 की धारा 3 (2) के अनुरूप न्यायमूर्ति वर्मा को पद से हटाने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। बिरला ने कहा, ‘‘संसद को इस मुद्दे पर एक स्वर में बोलना चाहिए और देश की जनता को भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करने का अपना संदेश भेजना चाहिए।'' इससे पहले, तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने मार्च में आरोपों की आंतरिक जांच शुरू की थी और तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। 

 प्रधान न्यायाधीश खन्ना ने यशवंत वर्मा को हटाने के लिए पीएम को लिखा था पत्र 
 प्रधान न्यायाधीश खन्ना ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने के लिए रिपोर्ट और उस पर न्यायाधीश की प्रतिक्रिया राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजा था। उच्चतम न्यायालय ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश खन्ना द्वारा न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने की सिफारिश के खिलाफ याचिका खारिज कर थी। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित समिति में शामिल न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने बैंगलोर विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की है और 1987 में अधिवक्ता के रूप में उनका पंजीकरण हुआ था। 2009 में उन्हें कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और 2012 में वह स्थायी न्यायाधीश बने।
 

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