Rahul Gandhi नागरिकता मामला: सोशल मीडिया पोस्ट से आहत जज ने खुद को सुनवाई से किया अलग, वकीलों को भी लगाई कड़ी फटकार

Edited By Anil Kapoor,Updated: 21 Apr, 2026 07:41 AM

judge recuses himself from hearing on rahul gandhi s citizenship matter

Lucknow News: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के कथित दोहरी नागरिकता मामले में उपजी स्थिति से व्यथित न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने बीते सोमवार को खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने इलाहाबाद...

Lucknow News: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के कथित दोहरी नागरिकता मामले में उपजी स्थिति से व्यथित न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने बीते सोमवार को खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वह इस मामले की सुनवाई के लिए किसी अन्य न्यायाधीश को नामित कर दें। हालांकि, न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने यह स्वीकार किया कि 17 अप्रैल को फैसला सुनाने से पहले उन्हें इस मामले में आरोपी राहुल गांधी को नोटिस जारी करना चाहिए था।

मिली जानकारी के मुताबिक, न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने सभी पक्षों के वकीलों को फटकार लगाई कि उन्होंने उनके सामने सही कानूनी स्थिति पेश नहीं की। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने 17 अप्रैल को एक याचिका पर सुनवाई करने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को कथित दोहरी नागरिकता मामले में राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। हालांकि, जब 18 अप्रैल को यह आदेश उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया तो उसमें बताया गया था कि आदेश टाइप होने और उस पर हस्ताक्षर होने से पहले न्यायाधीश को पता चला कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक अहम फैसले के अनुसार इस मुद्दे पर कोई भी फैसला सुनाने से पहले राहुल गांधी को नोटिस जारी करना अनिवार्य है।

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इसके बाद न्यायाधीश ने आदेश पर हस्ताक्षर करने के बजाय राहुल गांधी को नोटिस जारी करने के मुद्दे पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध कर दी। न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने सोमवार को जारी आदेश में स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले राहुल गांधी को नोटिस जारी करना अनिवार्य था। न्यायमूर्ति विद्यार्थी सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता एस. शिशिर विग्नेश द्वारा सोशल मीडिया पर किए गई पोस्ट से नाराज दिखे।

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न्यायमूर्ति ने कहा कि 17 अप्रैल को आदेश पारित होने के बाद याचिकाकर्ता द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए संदेश इस अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के समान हैं, लिहाजा इन बातों को ध्यान में रखते हुए मुझे इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करना ही उचित लगता है। न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने राहुल गांधी को नोटिस जारी करने की जरूरत के बारे में उचित कानूनी सहयोग नहीं दिए जाने का जिक्र करते हुए टिप्पणी की कि मुझे यह देखकर दुख हुआ कि इस मामले में पेश हुए वकील अदालत को निष्पक्ष तरीके से सहायता प्रदान करने के अपने कर्तव्य को निभाने में विफल रहे हैं।

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