48 साल का संघर्ष लाया रंग! 1978 संभल दंगे के पीड़ित रस्तोगी परिवार को Yogi सरकार ने दोबारा बसाया, मिला जमीन का पट्टा

Edited By Anil Kapoor,Updated: 05 Jun, 2026 07:14 AM

a riot affected family in sambhal received its first land lease after 48 years

संभल जिले में साल 1978 में हुए दंगों के एक पीड़ित परिवार को गुरुवार को जिला प्रशासन से जमीन के पट्टे का पहला प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ। यह उन परिवारों को फिर से बसाने की कोशिशों का हिस्सा है, जो वर्ष 1978 में हुए दंगे के बाद जिला छोड़कर चले गए थे।...

Sambhal News: संभल जिले में साल 1978 में हुए दंगों के एक पीड़ित परिवार को गुरुवार को जिला प्रशासन से जमीन के पट्टे का पहला प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ। यह उन परिवारों को फिर से बसाने की कोशिशों का हिस्सा है, जो वर्ष 1978 में हुए दंगे के बाद जिला छोड़कर चले गए थे। अधिकारियों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर ने राम शरण दास रस्तोगी के परिवार को 100 वर्ग मीटर जमीन के पट्टे का प्रमाण पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि रस्तोगी दंगों के बाद भयवश साल 1979 में संभल छोड़कर चले गए थे।

दंगाइयों ने की थी रामशरण रस्तोगी की बर्बर हत्या
अधिकारियों के अनुसार, यह आवंटन संभल के आलम सराय देहात गांव में एक समारोह के दौरान किया गया, जिसमें प्रार्थनाएं और वैदिक अनुष्ठान भी किए गए। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर मुरादाबाद के मंडल आयुक्त आंजनेय कुमार, जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई भी मौजूद थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, संभल में 29 मार्च 1978 को शुरू हुए सांप्रदायिक दंगे में अनेक लोग मारे गए थे और रामशरण दास रस्तोगी भी उन्हीं में शामिल थे। उन्होंने बताया कि दंगाइयों ने उनकी किराने की दुकान लूटने के बाद उसमें आग लगा दी थी और रस्तोगी की चाकू से ताबड़तोड़ प्रहार करके हत्या करने के बाद उनके शव को कुएं में फेंक दिया था।

पीड़ित परिवारों को दोबारा बसाने के लिए 100 वर्ग मीटर जमीन
पट्टा आवंटन प्रमाण पत्र वितरित करने के बाद मंत्री राठौर ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि इस कदम का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को अपनी जिंदगी फिर से शुरू करने में मदद करना है। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि 1978 के दंगों के दौरान 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, उनके घर जला दिए गए और लोगों पर जुल्म किए गए। कई परिवारों को मजबूरन पलायन करना पड़ा। सरकार ने ऐसे परिवारों को 100 वर्ग मीटर की जमीन देने का फैसला किया है, ताकि वे वापस आकर अपना घर फिर से बना सकें। इस समय दिल्ली में रह रहे रस्तोगी के पौत्र कपिल रस्तोगी ने बताया कि 29 मार्च 1978 को उनके दादा नखासा इलाके में अपनी दुकान पर बैठे थे, तभी वहां भीड़ आ गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मेरे दादा ने दुकान लूटे जाने का विरोध किया, तो भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। उन पर बार-बार चाकुओं से वार किए गए और बाद में उनका शव एक कुएं में पाया गया।

दिल्ली से वापस संभल आकर घर बनाएगा रस्तोगी परिवार
कपिल ने बताया कि धमकियों की वजह से उनका परिवार 1979 में संभल छोड़कर चला गया था और दशकों से बाहर ही रह रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राज्य विधानसभा में 1978 के दंगों का मुद्दा उठाए जाने के बाद परिवार ने उनसे संपर्क किया और प्रशासन ने उनके पुनर्वास के लिए कदम उठाने शुरू किए। कपिल ने कहा कि 48 साल के लंबे संघर्ष के बाद हमें न्याय मिला। कपिल के परिवार की सदस्य रुकमा रस्तोगी ने बताया कि दंगों के बाद धमकियां मिलने के कारण परिवार को संभल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। उन्होंने कहा, "हम वापस आकर यहीं अपना घर बनाना चाहते हैं। हम मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के आभारी हैं।

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