Edited By Mamta Yadav,Updated: 23 Nov, 2022 08:48 PM

जिले के एटा जसराना बाईपास को लगभग 32 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी वहां के किसान अपने मुआवजे के लिए दर-दर भटक रहे हैं। कई बार मुआवजा देने का प्रस्ताव पास हुआ कई बार पत्राचार हुए लेकिन आज तक किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा नहीं मिल पाया।
फिरोजाबाद: जिले के एटा जसराना बाईपास को लगभग 32 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी वहां के किसान अपने मुआवजे के लिए दर-दर भटक रहे हैं। कई बार मुआवजा देने का प्रस्ताव पास हुआ कई बार पत्राचार हुए लेकिन आज तक किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा नहीं मिल पाया। जिसमें 150 किसान शामिल थे। जिसमें 9:00 बजे के इंतजार में लगभग 50 किसानों की मौत भी हो चुकी है लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला है।

पूरा मामला फिरोजाबाद जनपद के तहसील जसराना का है। जहां पर आज से 32 वर्ष पूर्व जसराना एटा बाईपास निर्माण के लिए 150 किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई थी। जिसका उस दौरान लगभग साढ़े ₹500000 सरकार को देना था, लेकिन आज 32 साल पूरे हो चुके हैं। अगर आज के वैल्यू को देखा जाए तो लगभग 30 करोड़ का मुआवजा सरकार पर निकल रहा है। कई बार हाईकोर्ट में किसानों द्वारा याचिका दाखिल की गई कई बार आदेश हुए कई बार बैठक हुई लेकिन आज तक उन 150 गरीब किसानों का मुआवजा नहीं मिल पाया है। कई किसान मुआवजे का इंतजार करते-करते अब इस दुनिया से भी विदा हो चुके हैं।

बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धर्म सिंह यादव एडवोकेट, मिजाजी लाल व राजपाल सिंह ने प्रेसवार्ता में कहा कि जसराना में बाईपास बनाने के दौरान किसानों की भूमि जबरन ले ली गई थी। इसमें अवागढ़ मुस्तफाबाद मार्ग आंशिक व दिनौली गोरवा मार्ग, जसराना मुस्तफाबाद फरिहा बाईपास मार्ग के साथ-साथ तहसील सिरसागंज क्षेत्र के अंतर्गत उखरेंड से उरावर मार्ग एवं कौरारा आटेपुर गड़सान मार्ग के लिए किसानों की भूमि का अधिग्रहण करके सड़कों को बना दिया। इन किसानों को 1990 से लेकर आज तक मुआवजा नहीं मिला है।