Edited By Purnima Singh,Updated: 04 Jul, 2026 04:42 PM

भारत में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर हाल के दिनों में बहस तेज हो गई है। कुछ वाहन चालकों और उपभोक्ता समूहों ने माइलेज में गिरावट और इंजन पर असर को लेकर चिंता जताई है, साथ ही बीमा दावों को खारिज किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं...
नेशनल डेस्क : भारत में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर हाल के दिनों में बहस तेज हो गई है। कुछ वाहन चालकों और उपभोक्ता समूहों ने माइलेज में गिरावट और इंजन पर असर को लेकर चिंता जताई है, साथ ही बीमा दावों को खारिज किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इथेनॉल कोई प्रयोगात्मक या नया ईंधन नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा एक स्थापित वैकल्पिक ईंधन है।
ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण और वैश्विक उदाहरणों पर सरकार का पक्ष
सरकारी पक्ष के अनुसार इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। अमेरिका में E10 और E15 जैसे मिश्रण पहले से प्रचलित हैं, जबकि ब्राजील जैसे देशों में E27 से E35 तक का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। ब्राजील ने गन्ना आधारित इथेनॉल को पेट्रोल का प्रमुख विकल्प बनाकर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को भी बढ़ावा दिया है।
भारत में इथेनॉल ट्रेंड क्यों कर रहा है?
भारत में इथेनॉल तेजी से इसलिए ट्रेंड कर रहा है क्योंकि सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करना चाहती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों की आय में वृद्धि और प्रदूषण में कमी जैसे लाभ जुड़े हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इथेनॉल ब्लेंडिंग से अब तक भारी मात्रा में कच्चे तेल की जगह वैकल्पिक ईंधन का उपयोग हुआ है और कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
सरकार का भविष्य रोडमैप और फ्लेक्स-फ्यूल पर फोकस
सरकार का लक्ष्य इथेनॉल मिश्रण को और आगे बढ़ाना है तथा ऑटोमोबाइल सेक्टर को फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की ओर प्रेरित करना है। नीति आयोग और ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार आने वाले समय में देश में इथेनॉल आधारित ईंधन को और व्यापक बनाने पर काम किया जा रहा है, जिससे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।