Edited By Ramkesh,Updated: 29 Apr, 2026 01:23 PM

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला जल्द सामने आ सकता है। 26 मई को मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, ऐसे में सरकार पंचायत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए नई रणनीति पर विचार कर रही है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला जल्द सामने आ सकता है। 26 मई को मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, ऐसे में सरकार पंचायत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए नई रणनीति पर विचार कर रही है।
चुनाव में देरी की वजह
सूत्रों के मुताबिक, पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना और मतदाता सूची का समय पर तैयार न होना पंचायत चुनाव में देरी की बड़ी वजह बन रहा है। इसी कारण तय समय पर चुनाव कराना फिलहाल मुश्किल माना जा रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि कार्यकाल को बढ़ाया जा सकता है।
पंचायत चुनाव की मतदाता सूची 10 जून तक आएगी
राजभर ने कहा कि यूपी पंचायत चुनाव का केस अभी इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहा है, जहां चुनाव समय पर कराने की मांग की गई है। हालांकि अभी तक पंचायतों की मतदाता सूची तैयार न होने से ही संशय है। पंचायत चुनाव की मतदाता सूची ही 10 जून को सामने आएगी। वहीं पिछड़ा वर्ग आयोग गठित न होने से आरक्षण का मसला भी अटका है। बीडीसी, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी इस कारण देरी हो सकती है।
नई व्यवस्था पर मंथन
अब तक नियम के अनुसार कार्यकाल समाप्त होने पर एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया जाता है, लेकिन इस बार पहली बार प्रशासक समिति को जिम्मेदारी देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। संभावना है कि इस समिति का अध्यक्ष स्वयं ग्राम प्रधान को बनाया जाए। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से पंचायतों का कामकाज बिना रुकावट जारी रहेगा, जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते। जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।