Edited By Anil Kapoor,Updated: 14 Jul, 2026 06:35 AM

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एथनॉल मिश्रित ईंधन की नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एथनॉल मुनाफाखोरी का नया नाम है और यह सरकार, एथनॉल उत्पादकों तथा तेल कंपनियों की साझेदारी से किया जा...
Lucknow News: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एथनॉल मिश्रित ईंधन की नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एथनॉल मुनाफाखोरी का नया नाम है और यह सरकार, एथनॉल उत्पादकों तथा तेल कंपनियों की साझेदारी से किया जा रहा सरकारी मिलावट का मॉडल है।
एथनॉल से घट रहा माइलेज, वाहनों में आ रही खराबी: अखिलेश
सपा मुख्यालय की ओर से जारी बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि एथनॉल के समर्थन में यह तर्क दिया जाता है कि इससे प्रदूषण कम होगा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटने से आयात बिल कम होगा, लेकिन सरकार यह नहीं बता रही कि इससे वाहनों का माइलेज घट रहा है, वाहन जल्दी खराब हो रहे हैं और उन्हें चालू करने में भी दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि कम माइलेज के कारण लोगों को अधिक ईंधन भरवाना पड़ रहा है। साथ ही, वाहन बीच रास्ते में खराब हो रहे हैं, जिससे उनके रखरखाव का खर्च बढ़ गया है।
पुरानी गाड़ियों पर दोहरी मार: जंग का खतरा और इंश्योरेंस क्लेम का संकट
यादव ने कहा कि इससे वाहनों का पुनर्विक्रय मूल्य भी घट रहा है और उनकी कुल उपयोग अवधि भी कम हो रही है। उन्होंने कहा कि एथनॉल के कारण वाहनों में जंग लगने और तकनीकी खराबियां बढ़ रही हैं। सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि पुरानी गाड़ियां एथनॉल मिश्रित ईंधन के अनुरूप नहीं बनी हैं और आरोप लगाया कि बीमा कंपनियां इसे आधार बनाकर वाहन खराब होने पर दावा अस्वीकार करने का बहाना तलाश लेती हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि वह चंद मुनाफाखोरों के हित में आम जनता का शोषण क्यों कर रही है।