'17 से बढ़कर 81 हुए मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य क्षेत्र में बदली UP की तस्वीर', KGMU दीक्षांत समारोह में राजनाथ सिंह का बड़ा दावा

Edited By Purnima Singh,Updated: 13 Jul, 2026 05:11 PM

defence minister rajnath singh attended kgmu convocation ceremony

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत नए मानक स्थापित कर रहा है और साथ ही देश में जीन थेरेपी, परमाणु चिकित्सा तथा अन्य आधुनिक प्रौद्योगिकियों के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए स्वदेशी समाधान...

लखनऊ : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत नए मानक स्थापित कर रहा है और साथ ही देश में जीन थेरेपी, परमाणु चिकित्सा तथा अन्य आधुनिक प्रौद्योगिकियों के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए स्वदेशी समाधान विकसित किए जा रहे हैं।

भारत चिकित्सा अनुसंधान में बना रहा नए मानक
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर, सुलभ, किफायती, आधुनिक और जन-केंद्रित बनकर उभरी है। लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह ने कहा, "आज भारत जीन थेरेपी, परमाणु चिकित्सा और अन्य आधुनिक प्रौद्योगिकियों के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए स्वदेशी समाधान विकसित कर रहा है। चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में देश नए मानक स्थापित कर रहा है।"

केजीएमयू की उपलब्धियों का किया उल्लेख
उन्होंने कहा कि केजीएमयू ने देश को अनेक ऐसे चिकित्सक दिए हैं, जिन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्मश्री और डॉ. बी. सी. रॉय पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है। इस संस्थान से जुड़े लोगों ने सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की अद्वितीय मिसाल पेश की है।

पहली महिला कुलपति की सराहना
रक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति प्रोफेसर डॉ. सरोज चूरामणि गोपाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 2024 में 79 वर्ष की आयु में पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश लिया। उन्होंने कहा, "इससे यह संदेश मिलता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।"

रोगों की रोकथाम और आधुनिक इलाज पर जोर
सिंह ने कहा कि सरकार केवल उपचार पर ही नहीं, बल्कि रोगों की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि सीएआर-टी (चिमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल) थेरेपी कैंसर के उपचार में अत्यंत उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले लोगों को इलाज के लिए अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ती थी, लेकिन अब 'आयुष्मान भारत' योजना के तहत पात्र लोगों को मुफ्त उपचार की सुविधा मिल रही है।

स्वदेशी चिकित्सा तकनीकों का किया जिक्र
रक्षा मंत्री ने कहा, "पिछले 12 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार का लक्ष्य केवल चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है जो सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण हो।" उन्होंने अंगदान को मानवता के लिए 'सबसे बड़ा उपहार' बताते हुए कहा कि आज भी समाज में इसे लेकर अनेक भ्रांतियां और झिझक हैं, जिन्हें दूर करने में चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

सिंह ने कहा, "हमारे वैज्ञानिकों ने हीमोफीलिया के उपचार के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल प्रदर्शन किया है। वहीं, पुणे के एक संस्थान के वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के उपचार के लिए अत्याधुनिक नैनो मेडिसिन विकसित की है।"

उन्होंने कहा कि तीन दशक बाद वर्ष 2024 में भारत में पेनिसिलिन-जी का उत्पादन दोबारा शुरू हुआ है। साथ ही, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना ने चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी विनिर्माण को नई गति प्रदान की है।
 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!