विश्व के सबसे बड़े ISEF 2026 में अखिलेश वत्स का नाम दर्ज, उनके मार्गदर्शन में 70 देशों को पछाड़ Filipino शोधार्थी पहुंची अमेरिका

Edited By Ramkesh,Updated: 16 Apr, 2026 08:45 PM

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भारतीय वैज्ञानिक एवं ACME Research Solutions के संस्थापक अखिलेश वत्स ने एक बार फिर भारत का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया है। उनके वैज्ञानिक मार्गदर्शन में फिलीपींस की शोधार्थी छात्रा यूरेका हेराग्रेस तुया ने विश्व के 70 से अधिक देशों के...

बागपत: भारतीय वैज्ञानिक एवं ACME Research Solutions के संस्थापक अखिलेश वत्स ने एक बार फिर भारत का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया है। उनके वैज्ञानिक मार्गदर्शन में फिलीपींस की शोधार्थी छात्रा यूरेका हेराग्रेस तुया ने विश्व के 70 से अधिक देशों के प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय विज्ञान प्रतियोगिता Regeneron ISEF 2026 में अपना स्थान पक्का किया है। यह प्रतियोगिता 9 से 15 मई 2026 के बीच फीनिक्स, अमेरिका में आयोजित की जाएगी।

ISEF अर्थात International Science and Engineering Fair प्रतिवर्ष अमेरिका में आयोजित होती है और इसे विश्व की सबसे प्रतिष्ठित विज्ञान प्रतियोगिता माना जाता है। इसमें दुनियाभर के लाखों छात्रों में से केवल चुनिंदा प्रतिभागियों को स्थान मिलता है। इस प्रतियोगिता में भाग लेना किसी भी शोधार्थी के जीवन की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक माना जाता है।

फिलीपींस के Labangal National High School, General Santos City की शोधार्थी यूरेका हेराग्रेस तुया ने अपने शोध में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने की दिशा में Ficus Pseudopalma (Lubi-Lubi) नामक औषधीय पौधे के गुणों का गहन अध्ययन किया। शोध का विषय स्तन कैंसर की कोशिकाओं पर इस पौधे के प्रभाव से जुड़ा था।  इस दौरान अखिलेश वत्स ने यूरेका को वैज्ञानिक दिशा प्रदान करते हुए शोध को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि किसी भारतीय निजी शोध संस्था ने एक विदेशी छात्र के शोध को ISEF जैसे विश्व मंच तक पहुँचाया हो। भारत और फिलीपींस के बीच वैज्ञानिक सहयोग को नई दिशा देने वाला यह प्रयास दोनों देशों के सम्बन्धों को और प्रगाढ़ करता है।

ACME Research Solutions के संस्थापक एवं निदेशक अखिलेश वत्स एक अनुभवी भारतीय वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में वे PEXACY International Journal of Pharmaceutical Science के प्रधान सम्पादक भी हैं। उनकी संस्था का उद्देश्य सदैव अंतरराष्ट्रीय शोधार्थियों को विश्वस्तरीय सुविधाएँ उपलब्ध कराना रहा है। यह उपलब्धि उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

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