प्राथमिक विद्यालय पर लोगों ने जमाया कब्जा, निगम को है बस किराए से मतलब

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प्राथमिक विद्यालय पर लोगों ने जमाया कब्जा, निगम को है बस किराए से मतलबप्राथमिक विद्यालय पर लोगों ने जमाया कब्जा, निगम को है बस किराए से मतलबप्राथमिक विद्यालय पर लोगों ने जमाया कब्जा, निगम को है बस किराए से मतलब

मुरादाबादः उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा को दुरस्त करने के लिए योगी सरकार की तरफ से कवायद शुरू की गई है। इसमें बच्चों की यूनिफॉर्म से लेकर जूतों तक की बात कहीं गई है, लेकिन क्या जिन विद्यालय में बच्चे पढ़ेंगे, क्या उन विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए जगह है? दरअसल हम बात कर रहे है सरकारी स्कूल में अवैध कब्जों की। सूबे के मुरादाबाद जिले में लोग प्राथमिक विद्यालयों पर कब्जा किए हुए है। उनका कहना है कि वह पुश्तों से यहां रह रहे है। यह सरकारी स्कूल नहीं उनके घर है।

घर बनाने पर निगम को देते है खर्चा
दरअसल मुरादाबाद में प्राथमिक विद्यालयों पर लोग कब्जा किए हुए है। लोगों ने विद्यालयों को अपना रहने के लिए घर बना लिया है। पहला मामला मुरादाबाद के मकबरा मोहल्ला में बने प्राथमिक स्कूल का है, जिसके ऊपर एक परिवार रहता है और रहने के लिए जगह कम पड़ने पर 2 मंजिल और बना डाली। वो भी बिना किसी परमिशन के। उधर जब उनसे पूछा गया तो उनका कहना है कि उनके बाप-दादा इसमें रहते थे। अब वो रह रहे हैं और नगर निगम को किराया देते हैं। किसी को कोई परेशानी नहीं है इसलिए और मंजिल बनवा ली। स्कूल का रास्ता अलग है, हमारा अलग।

एेसा ही एक और मामला
दूसरा मामला शहर के सिविल लाइन के प्राथमिक विद्यालय गांधी पार्क का है। इस स्कूल के अंदर एक परिवार रहता है। इन्होंने भी जगह कम पड़ने पर और कमरे बना लिए है। स्कूल में रहने की वजह बताते हुए घर के मुखिया कहते है कि उनके दादा यहां चपरासी थे, वो यहां रहा करते थे। वो तो मर गए, उसके बाद वो यहां रहते है।

इस सबका अधिकारियों को नहीं मालूम!
एेसे में हैरत की बात ये है कि इसी स्कूल में ही खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यालय भी है, लेकिन उन्होंने भी कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। इससे ज्यादा हैरानी इस बात की है कि ये दोनों स्कूल ही शहर में हैं, न की दूरदराज इलाके में नहीं। इस बाबत शिक्षा अधिकारी विशु गवरियाल का कहना है कि मकबरे वाले विद्यालय पर बिल्डिंग बनाए जाने की जानकारी उन्हें नहीं है। सिविल लाइन में ग़ांधी नगर में प्राथमिक विद्यालय में लोगों के रहने पर बताया कि 1972 से यह लोग रह रहे है। विभाग की तरफ से अभी तक कोई आपत्ति नहीं है।

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