मथुरा में बोले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री- ‘बच्चों को कलाम जैसा बनाएं, जेहादी नहीं… शिक्षा ही सबसे बड़ा मार्ग’

Edited By Mamta Yadav,Updated: 16 Nov, 2025 01:00 AM

dhirendra krishna shastri said in mathura  make children like kalam not jihad

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता पदयात्रा अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। नौवें दिन की पदयात्रा ब्रजभूमि को समर्पित रही और रात्रि विश्राम मथुरा के निकट जैत स्थित राधा गोविंद मंदिर परिसर में हुआ।...

Mathura News: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता पदयात्रा अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। नौवें दिन की पदयात्रा ब्रजभूमि को समर्पित रही और रात्रि विश्राम मथुरा के निकट जैत स्थित राधा गोविंद मंदिर परिसर में हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि देश की एकता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देश की संपत्ति और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर सभी को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि देश में रहते हुए राष्ट्रीय मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों का सम्मान सभी का कर्तव्य है। इस पदयात्रा में पुंडरीक महाराज, जया किशोरी, अभिनेता राजपाल यादव, अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और फिल्म निर्माता एकता कपूर सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।

“शिक्षा बच्चों को प्रगति के मार्ग पर ले जाती है”
संबोधन में धीरेंद्र शास्त्री ने मुस्लिम समाज सहित सभी समुदायों से अपील की कि वे बच्चों को अच्छी और आधुनिक शिक्षा दें ताकि वे “डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिक और देश के प्रगतिशील नागरिक बनें, न कि मजहबी तालीम के नाम पर जिहाद के रास्ते पर जाएं।” उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह साधन है जो समाज को आगे बढ़ाने और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का काम करती है। जैत में आयोजित कार्यक्रम में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज, देवकीनंदन ठाकुर, गौलोक पीठाधीश महाराज, राजनगर विधायक अरविंद पटेरिया और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।

ब्रज में प्रवेश के साथ यात्रा का उत्साह बढ़ा
वृंदावन के संत गीता मनीषी महाराज ने कहा कि पदयात्रा ब्रज की सीमा में प्रवेश कर चुकी है और अब वृंदावन की ओर अग्रसर है। उन्होंने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना को जगाने वाला अभियान बताया। परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि समाज को एकता और सह-अस्तित्व की भावना के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “सनातन सिद्धांत यही कहता है कि अपने पंथ को मानो, लेकिन सभी को एक समझो।” पदयात्रा के आयोजकों का मानना है कि यह यात्रा समाज में शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने का संदेश दे रही है।

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