UP: एक स्कूल एेसा भी जहां स‍िर्फ मिड-डे मील के ल‍िए आते हैं 5 स्टूडेंट

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UP: एक स्कूल एेसा भी जहां स‍िर्फ मिड-डे मील के ल‍िए आते हैं 5 स्टूडेंटUP: एक स्कूल एेसा भी जहां स‍िर्फ मिड-डे मील के ल‍िए आते हैं 5 स्टूडेंटUP: एक स्कूल एेसा भी जहां स‍िर्फ मिड-डे मील के ल‍िए आते हैं 5 स्टूडेंट

अमेठीः कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भले ही प्रदेश की योगी सरकार पर शिक्षा बजट को लेकर तंज कस रहे हो, लेकिन स्वयं उनके पूर्व के संसदीय क्षेत्र अमेठी में चिराग तले अंधेरा है। तकरीबन एक दशक तक सांसद रहते हुए वो संसदीय क्षेत्र की शिक्षा प्रणाली को पटरी पर नहीं ला सकें।

दरअसल हम बात एक रहे है यहां के एक प्राथमिक विद्यालय की जहां सिर्फ 5 बच्चे पढ़ते हैं। हालांकि पढ़ते हैं, कहना ठीक नहीं होगा। ये बच्चे सिर्फ खाने के लिए स्कूल आते हैं। हैरानी की बात ये है - बच्चे खुद लकड़ी का जुगाड़ करते हैं, उसके बाद मिड डे मील बनता है।

मिड-डे मील खाने आते है छात्र
बता दें कि यहां रानीपुर क्षेत्र में बलभद्रपुर प्राथमिक विद्यालय बच्चों के भविष्य बनाने की जगह खुद के भविष्य पर आंसू बहा रहा है। यहां स्कूल में बने कमरे की दीवार गिरने की कगार पर है। शुल्भ शौचालय में दरवाजे नहीं हैं। स्कूल की बिल्डिंग जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है, वर्षों से बिल्डिंग की डेंटिंग-पेंटिंग नहीं हुई है।

भोजन पकाने के लिए भी करना पड़ता है जुगाड़
यहीं नहीं बच्चों को स्कूल में मिलने वाले मध्यान्ह भोजन को पकाने के लिए जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है। भोजन पकाने के लिए बच्चे लकड़ियां लाते हैं। पानी पीने के लिए गिलास तक नहीं है।

2011 में 11 लाख रुपए की लागत से हुआ था निर्माण
जानकारी के मुताबिक स्कूल का निर्माण वर्ष 2011 में 11 लाख रुपए की लागत से हुआ था, जहां अव्यवस्थाओं की ख़बर पाकर तत्कालीन डीएम चंद्रकांत पाण्डेय ने स्वयं इसकी जांच किया था।

डीएम ने दिए कार्यवाई के निर्देश
वहीं डीएम योगेश कुमार ने इस मामले पर त्वरित कार्यवाही करते हुए जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही पंचायती राज एक्ट के तहत सम्बंधित क्षेत्र के ग्राम प्रधान जो अपने क्षेत्र की समस्त राजकीय सम्पत्ति का रख रखाव नहीं कर पा रहे हैं, उसके खिलाफ कार्यवाही के निर्देश भी दिए हैं।डीएम ने कहा है कि स्कूल की जर्जर व्यवस्था में जल्द सुधार लाया जाएगा।



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