इलाहाबादः यहां भाई-बहन ने शादी के लिए खटखटाया प्रशासन का दरवाजा और फिर...

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इलाहाबादः यहां भाई-बहन ने शादी के लिए खटखटाया प्रशासन का दरवाजा और फिर...इलाहाबादः यहां भाई-बहन ने शादी के लिए खटखटाया प्रशासन का दरवाजा और फिर...इलाहाबादः यहां भाई-बहन ने शादी के लिए खटखटाया प्रशासन का दरवाजा और फिर...

इलाहाबादः  संगम नगरी इलाहाबाद में विचित्र मामला सामने आया, जिसने पुलिस प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया। दरअसल यहां एक भाई-बहन शादी के बंधन में बंधे हैं। दूल्हे ने अपनी ममेरी बहन से शादी न होने पर जान देने की धमकी देते हुए थाने की चौखट पर फरियाद लगाई थी। जिसके बाद पुलिस ने दोनों की मंदिर में शादी कराकर सादे कागज पर लिखा-पढ़ी कराई। फिलहाल यह पूरा मामला चर्चा का विषय बना गया है।

जानिए पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक मामला यमुनापार के घूरपुर थाने का है। जहां एक युवक को अपनी ममेरी बहन से प्यार है, बहन भी उसे बहुत प्रेम करती है। दोनों एक साथ जीने मरने की कस्में भी खा चुके है। परिजनों को प्रेम में रोड़ा बनते देख उन्होंने पुलिस से मदद की गुहार लगाई है।

भाई-बहन ने लगाई पुलिस से मदद की गुहार
बीते दिन दोनों सीधे थानेदार के ऑफिस में घुसे और थानेदार से बोले, 'सर हमारी शादी करा दो, नहीं तो हम अपनी जान दे देंगे'। हमारे माता-पिता हमारे रिश्ते को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। थानेदार ने दोनों को कुर्सी पर बैठाया और कहा कि परेशान न हो और पूरी बात बताओ यहां तुम्हारी पूरी मदद होगी।

पुलिस ने परिजनों की रजामंदी से कराई शादी
देर शाम दोनों के परिजनों को बुलाकर थाने के मंदिर में ही शादी कराई गई, इस प्रेमी जोड़े को सामाजिक पति-पत्नी की मान्यता दी गई। घूरपुर के रहने वाले नीरज कुशवाहा अपनी प्रेमिका सरिता को लेकर जब थाने पंहुचा तो थानेदार अरविंद त्रिवेदी को पूरी कहानी सुनते हुए बताया कि लड़की उसकी रिश्ते में बहन है तो थानेदार साहब भी चौंक गए, लेकिन पूरी प्रेम कहनी सुनने के बाद वो शादी करने को राजी को गए। नीरज के मुताबिक वो बारहवीं तक पढ़ने के बाद 2015 में रेस्टोरेंट चलाने लगा। रेस्टोरेंट उसने अपने ननिहाल चित्रकूट में खोला था जहां रहने के दौरान वो अपनी बहन सरिता को पसंद करने लगा।

दरोगा ने भी शगुन के साथ दिया आर्शीवाद
बता दें कि शादी से पूर्व लगभग 4 घंटे तक थानेदार अरविंद परिजनों को शादी हो जाने की दलीले देते रहे। काफी समझाने-बुझाने के बाद देर शाम दोनों ओर से मंजूरी मिली तो थाने के ही मंदिर में शादी कराई गई। विदाई के समय थानाध्यक्ष अरविंद त्रिवेदी ने शगुन के रूप में लड़की को अपनी तरफ से 1100 रुपए देकर सुखी जीवन का आशीर्वाद दिया। उन्होंने ही मामले की जानकारी देते हुए बताया कि दोनों पक्षों से शादी की परमीशन देने की लिखित तहरीर भी ली गई, जिससे शादी पर भविष्य में कोई संकट न आए। लिखा-पढ़ी के कागजों की कई कॉपियां कराकर सभी को दे दी गई है और रिकॉर्ड में भी इसे रखा गया है।



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