एेसी है मंदिर की मान्यता, साल में 3 दिन होते हैं मां की प्रत‍िमा के दर्शन

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एेसी है मंदिर की मान्यता, साल में 3 दिन होते हैं मां की प्रत‍िमा के दर्शनएेसी है मंदिर की मान्यता, साल में 3 दिन होते हैं मां की प्रत‍िमा के दर्शनएेसी है मंदिर की मान्यता, साल में 3 दिन होते हैं मां की प्रत‍िमा के दर्शन

वाराणसीः वाराणसी में धरतेरस के दिन मान्यता के हिसाब से साल में 3 दिन अन्नकूट मां की स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन होते है। महंत रामेश्वरपुरी ने बताया कि अन्नपूर्णा से महादेव ने काशीवासियों और भक्तों के लिए भूखा न रहने का आशीर्वाद मांगा था। मां की ऐसी कृपा कि इस नगरी में कोई भी इंसान भूखा नहीं सोता। ऐसा खजाना जो केवल साल में एक बार खुलता है।

महंत ने बताया कि पुराणों में वर्णित है कि एक बार जब काशी में अकाल पड़ा था, चारों ओर त्राही-त्राही मची थी। लोग भूखों मर रहे थे, उस समय शिव को भी समझ नहीं आ रहा था कि इस नगरी में ये क्या हो गया। उन्होंने कहा कि ध्यान मग्न होने पर भगवान शिव को राह दिखी कि मां अन्नपूर्णा ही बचा सकती है। तब शिव खुद मां के पास जाकर भिक्षा मांगते हैं। माता ने उसी वक्त शिव को वचन दिया कि आज के बाद कोई भी इस नगरी में भूखा नहीं रहेगा और मेरा खजाना पाते ही लोगो के दुख दूर हो जाएंगे।


 



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