यहां दिखती है आपसी सौहार्द की मिसाल, मुस्लिमों के इमामबाड़ों की सजावट करते हैं हिंदू

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यहां दिखती है आपसी सौहार्द की मिसाल, मुस्लिमों के इमामबाड़ों की सजावट करते हैं हिंदूयहां दिखती है आपसी सौहार्द की मिसाल, मुस्लिमों के इमामबाड़ों की सजावट करते हैं हिंदूयहां दिखती है आपसी सौहार्द की मिसाल, मुस्लिमों के इमामबाड़ों की सजावट करते हैं हिंदू

बांदा(जफर अहमद): शहर में इन दिनों हिंदू-मुस्लिम के आपसी सौहार्द की मिसाल देखने को मिल रही है। जहां शहर में नवरात्रों के मौके पर जगह-जगह देवी पंडाल और मोहर्रम के मौके पर इमामबाड़े अगल बगल में बनाए गए हैं। जिससे पूरे देश में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की एक सीख जा रही है।

दरअसल बांदा के अमर टॉकीज चौराहे में मर्दांनाका, खाइपार, खुतला सहित तमाम जगह ऐसी हैं, जहां एक ही जगह देवी पंडाल और इमामबाड़ा हैं। खास बात यह है कि जब देवी पंडाल में आरती होती है तब मुस्लिम भाई ढोल नगाड़े बंद कर देते हैं और जब इमामबाड़ों में फातिया होती है तो देवी पंडाल के लाउडस्पीकर बंद कर दिए जाते हैं। जो अपने आप में आपसी सौहार्द की एक मिसाल है।

यह लगभग 10 दिन तक चलेगा और इसके पहले भी पिछले कई सालों से यहां पर एक साथ ही नवरात्रि और मोहर्रम का त्यौहार आता है। आपसी सौहार्द की एक मिसाल यहां पर देखने को मिलती है जो लोगों को एक सीख भी देती है। यहां के ज्यादातर इमामबाड़ों की सजावट हिंदू समुदाय के लोग ही करते हैं।



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