आवारा कुत्तों का आतंकः 5 साल की मासूम को नोच-नोच कर उतारा मौत के घाट, प्रशासन खामोश

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आवारा कुत्तों का आतंकः 5 साल की मासूम को नोच-नोच कर उतारा मौत के घाट, प्रशासन खामोशआवारा कुत्तों का आतंकः 5 साल की मासूम को नोच-नोच कर उतारा मौत के घाट, प्रशासन खामोशआवारा कुत्तों का आतंकः 5 साल की मासूम को नोच-नोच कर उतारा मौत के घाट, प्रशासन खामोश

सहरानपुरः सहरानपुर में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां महज 5 साल की एक मासूम बच्ची को आवारा कुत्तों ने नोच-नोच कर मार डाला। वहीं शहर के बीच हुई इस रोंगटे खड़़े करने वाली खबर ने नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही भी उजागर कर दी है।

जानकारी के मुताबिक मामला नगर कोतवाली के नूरबस्ती इलाके में रहने वाले कलीम की बेटी इंशा का है। बीती शाम इंशा घर के बाहर खेल रही थी। वहीं10-12 आवारा कुत्तों के झुंड ने उसे घेरकर बुरी तरह नोचना शुरु कर दिया। मौके पर पहुंचे लोगों ने बामुश्किल कुत्तों के झुंड से मासूम को बाहर निकाला और अस्पताल लेकर गए जहां उसने दम तोड़ दिया। वहीं स्वास्थ्य विभाग अधिकारी गीताराम ने कहा कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले भी हो चुकी हैं कई घटनाएं
पिछले 2 माह के दौरान आवारा कुत्तों के आतंक की यह तीसरी घटना है। इससे पहले चिलकाना क्षेत्र में एक महिला सफाई कर्मी को आवारा कुत्तों ने अपना शिकार बनाया था। वहीं इसी क्षेत्र के पठेड़ गांव में भी 5 साल के एक मासूम बच्चे को भी आवारा कुत्ते अपना शिकार बना चुके हैं।

सरकारी विभागों की लापरवाही उजागर
दरअसल आवारा पशुओं को पकड़ कर आवासीय क्षेत्रों से दूर पहुंचाने की ज़िम्मेदारी नगर निगम और संबंधित नगर पालिकाओं की होती है। लेकिन एक के बाद एक होने वाली घटनाओं के बाद भी अफसरों की नींद खुलने का नाम नहीं ले रही।

क्यों बन रहे आवारा कुत्ते आदमखोर?
आवारा कुत्तों के आदमखोर बनने के पीछे कमेलों का बंद होना एक बड़ा कारण हो सकता है। दरअसल पिछले कई माह से बंद पड़े कमेलों के आसपास रहने वाले कुत्ते अपनी भूख मिटाने के लिए कमज़ोर शिकार की तलाश में रहते हैं। यही वजह है कि ये मासूम बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं।



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