उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड की 30 नई चोटियों में पर्यटन गतिविधियों व ट्रेकिंग पर लगाई रोक

Edited By Nitika, Updated: 04 Aug, 2022 03:14 PM

tourism activities and trekking banned in 30 new peaks

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्र में 30 नई चोटियों और ट्रेकिंग मार्गों पर पर्यटन गतिविधियों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की युगलपीठ ने अल्मोड़ा निवासी जितेंद्र यादव की...

 

नैनीतालः उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्र में 30 नई चोटियों और ट्रेकिंग मार्गों पर पर्यटन गतिविधियों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की युगलपीठ ने अल्मोड़ा निवासी जितेंद्र यादव की प्लास्टिकजनित कूड़े लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

न्यायालय ने साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) देहरादून को 4 सप्ताह में पर्यावरण के लिहाज से एक समग्र ऑडिट रिपोर्ट पेश करने को कहा हैै। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि उत्तराखंड पर्यटन विभाग की ओर से प्रदेश में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 30 नई चोटियों व मार्गों को ट्रैकिंग के लिए खोला गया है। इससे उच्च हिमालयी क्षेत्र में देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा और राजस्व में वृद्धि होगी लेकिन सरकार की ओर से यहां कूड़ा निस्तारण के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किया गया है। जिन नए ऊंचाई वाले मार्गों को ट्रेकिंग के लिए खोला गया है, उनमें नारायण पर्वत, नर पर्वत, लमचिर दक्षिण, लमचिर, भगन्यू, पावागढ़, महालय पर्वत, यान बुक, रत्नागिरी व लंदा लपाक शामिल हैं। इसी प्रकार नई चोटियों में से कुछ के नाम हैं- भृगु पर्वत, कालीढांग, ऋषिकोट, हिमस्खलन, मांडा-3, मांडा-2, गरूर पर्वत, देवतोली व ऋषि पर्वत आदि शामिल हैं। हालांकि सरकार की ओर से कहा गया कि इन जगहों में कूड़ा निस्तारण के मामले में पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं।

अदालत ने हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र में कूड़ा का उपयुक्त निस्तारण से नहीं होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए महापौर जोगिंदर रौतेला को अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में जनित प्लास्टिक कूड़ा के मामले में भी गंभीर रूख अख्तियार किया है। शहरी विकास निदेशक ने अदालत को बताया कि सरकार प्लास्टिक कूड़े को लेकर गंभीर है और इस दिशा में विभिन्न कदम उठा रही है। पेश शपथपत्र में आगे कहा गया कि कांवड़ यात्रा के दौरान कई मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण कर दिया गया है। शहरी विकास विभाग के निदेशक के जवाब से अदालत संतुष्ट नजर नहीं आई और कहा कि धरातल पर स्थिति इसके अलग है। कूड़ा निस्तारण के मामले में सरकारी मशीनरी की ओर से कागजों में खानापूर्ति की जा रही है।

याचिकाकर्ता की ओर से हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र में डॉक्टर कालोनी व फारेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के पास लगे कूड़े के ढेर के चित्र अदालत मेें पेश किए और कहा गया कि यहां लंबे समय से निगम की ओर से कूड़ा का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। अदालत ने इसे बेहद गंभीरता से लिया और महापौर को अदालत के आदेश का अवमानना के मामले में नोटिस जारी कर दिया।
 

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