नोटबंदी ने ली बलि: पैसे की किल्लत से जूझ रहे किसान ने खुद को मारी गोली

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बांदा(जफर अहमद): कालेधन पर केंद्र सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक आम देशवासियों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। यूपी के बुन्देलखण्ड में हालात बद से बदतर हो रहे हैं। नोटबंदी बुन्देलखण्ड में अब परेशानहाल लोगों की जान लेने पर आमादा है। नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत से जूझ रहे बुन्देलखण्ड के बाँदा के बैंक, एटीएम ने खास तौर पर किसानों को पूरी तरह तबाह कर रखा है। हालात इतने भयावह हैं कि पिछले एक महीने में जहाँ बैंक की लाईन में कई लोगों ने दम तोड़ा है तो वहीं एग्जाम फीस न जमा करने से परेशान एक युवक ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। इन सदमों से लोग अभी उबर ही नहीं पाये थे कि बैंक से निराश एक और किसान ने अपनी ही लाइसेंसी बन्दूक से खुद को गोली मारकर ख़ुदकुशी कर ली।

क्या है पूरा मामला?
मामला उत्तर प्रदेश के बांदा जिले का है। जहां अतर्रा के अन्र्तगत पड़ते गांव खमहौरा का किसान रामभवन सिंह ने खुद को मारकर हत्या कर ली। 8 बीघे जमीन का मामूली काश्तकार रामभवन पिछले कई दिनों से बैंक और एटीएम में लाइन लगाए था लेकिन हर बार वह अपना ही पैसा निकालने में नाकाम रहा। कई साल से सूखे और ओलावृष्टि से तबाह रामभवन नोटबंदी के बाद से अपना जमा पूँजी बैंक में जमा कर चुका था। सूखा राहत का चेक भी मिल गया था लेकिन बैंक से पैसा निकलना दूभर हो गया। पैसा न मिलने से घर में खाने की भी परेशानी, खेती के लिए बीज और खाद भी नहीं मिल सकी और ऊपर से पत्नी के मायके में विवाह समारोह। बस इसी से परेशान रामभवन ने अपनी लाइसेंसी दोनाली बन्दूक से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर लिया। 

परिजनों ने नोटबंदी को बताया जिम्मेदार
मृतक के परिजन उसकी मौत की वजह सीधे तौर पर नोटबंदी ही बता रहे हैं। परिजनों का कहना है कि मृतक इस बार खेत में भी बीज नहीं डाल सका और न ही अपने बच्चों की फीस जमा कर पाया। परिजनों का कहना है कि तीन दिन की बैंकबन्दी और एटीएम में कैश न होने से उसके परिवार को खाने का भी संकट पैदा हो गया था। 

क्या कहते हैं अधिकारी?
वहीं इस सम्बन्ध में जब अतर्रा एसडीएम अरविन्द तिवारी से जानकारी का प्रयास किया गया तो उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से कैमरे के सामने आने से इनकार कर दिया। जब मोबाइल से उनसे इस सम्बन्ध में बात की गयी तो उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि इस मामले में पूरी जानकारी नहीं है, मिलने के बाद ही कुछ कहेंगे।

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