Edited By Ramkesh,Updated: 26 Feb, 2025 01:58 PM
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महाशिवरात्रि पर भोले की नगरी काशी में अद्भुत नजारा देखने को मिला। हाथ में त्रिशूल, तलवार और गदा लहराते नागा साधु शाही शोभायात्रा निकाल बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे और उनका जलाभिषेक किया। इस दौरान काशी विश्वनाथ धाम में पुष्प वर्षा से नागा साधुओं का...
वाराणसी: महाशिवरात्रि पर भोले की नगरी काशी में अद्भुत नजारा देखने को मिला। हाथ में त्रिशूल, तलवार और गदा लहराते नागा साधु शाही शोभायात्रा निकाल बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे और उनका जलाभिषेक किया। इस दौरान काशी विश्वनाथ धाम में पुष्प वर्षा से नागा साधुओं का स्वागत किया गया। नागा साधुओं के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के रास्ते की बैरिकेडिंग की गई है। लाखों की संख्या में भक्त नागा संतों का आशीर्वाद लेने के लिए रात से ही सड़क किनारे खड़े हुए हैं।
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सबसे पहले जूना अखाड़े के नागा संन्यासी मंदिर पहुंचे। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि भी उनके साथ रहे। नागा साधुओं की पेशवाई में गाड़ियां, ढोल-नगाड़े और अस्त्र-शस्त्र के साथ करतब दिखाते हुए साधु शामिल रहे। आधी रात से ही करीब 2 लाख भक्त 3km लंबी कतार में लगे हैं। सुबह से अब तक 2.37 लाख भक्त दर्शन कर चुके हैं। तड़के 2:15 बजे बाबा विश्वनाथ की मंगला आरती हुई। उनका दूल्हे की तरह श्रृंगार किया गया।
मंगला आरती के दौरान प्रवेश रोकने पर श्रद्धालुओं ने हंगामा कर दिया। उनकी पुलिसकर्मियों से नोकझोंक हो गई। श्रद्धालुओं को समझाकर शांत कराया गया। इसके बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। यहां शिव भक्त बड़ी श्रद्धा से पूजा करते हैं और इस मंदिर का विशेष महत्व महाशिवरात्रि के दिन होता है। इस मंदिर में भक्तों की आस्था के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा भी पूरे धूमधाम से होती है। बारा शिव मंदिर प्रयागराज के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है, जो त्रिवेणी संगम के पास स्थित है। इस मंदिर में महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा होती है और यहां भक्तों की भारी भीड़ लगती है। इस मंदिर का इतिहास भी बहुत पुराना है और यहां भगवान शिव का अछ्वुत रूप पूजा जाता है। पूरी दुनिया में तमाम शिव मंदिरों की अपनी अलग अलग मान्यताएं हैं।
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इसी प्रकार जिले में एक ऐसा भी शिव मंदिर है जहां लोग बंद किस्मत का ताला खोलने के लिए मंदिर में ताला बंद करते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद तालों को खोल देते हैं। यह शिव मंदिर करीब 500 वर्ष पुराना है। जमीन से करीब 5 फिट गहरे में बना मंदिर बिल्कुल अलौकिक और रहस्य से भरा हुआ है। इस मंदिर के चारों तरफ लोग ताले बंद करते हैं। इस मंदिर में बंद किये गये तालों का रहस्य काफी पुराना है। मंदिर के चारों ओर बनी खिड़कियों और दरवाजों पर लोग बड़ी संख्या में ताले बंद करते हैं। लोगों की आस्था और विश्वास को लेकर इस मंदिर में भारी भीड़ जुटती है। इस मंदिर के अंदर विराजमान शिवलिंग को नाथ सम्प्रदाय ने स्थापित किया था। इस मंदिर में स्थापित शिव को ताला वाले महादेव भी कहते है। नाथ सम्प्रदाय भारत का एक हिंदू धार्मिक पंथ है।
मध्ययुग में उत्पन्न इस सम्प्रदाय में बौद्ध, शैव तथा योग की परम्पराओं का समन्वय दिखायी देता है। यह मंदिर भक्तों के बीच विशेष रूप से प्रसिद्ध है। नाथेश्वर मंदिर में शिव की उपासना से भक्तों को आशीर्वाद और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है। नागवासुकी मंदिर प्रयागराज के दारागंज में गंगा नदी के तट पर स्थित है। एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।
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यह मंदिर भगवान शिव के रूप नागवासुकी को समर्पित है। इस मंदिर में नागों के राजा वासुकी नाग विराजमान रहते हैं। मान्यता है कि प्रयागराज आने वाले हर श्रद्धालु और तीर्थयात्री की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक की वह नागवासुकी का दर्शन न कर लें। इस मंदिर में विशेष रूप से नाग देवता की पूजा की जाती है, जिनकी पूजा से भक्तों को उनके पापों से मुक्ति और जीवन में समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही कालसर्प दोष से भी मुक्ति मिलती है। नाग पंचमी के दिन दूर दराज से लाखों श्रद्धालु दर्शन पूजन के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जब मुगल बादशाह औरंगजेब भारत में मंदिरों को तोड़ रहा था, तो वह अति चर्चित नागवासुकी मंदिर को खुद तोड़ने पहुंचा था। जैसे ही उसने मूर्ति पर भाला चलाया, तो अचानक दूध की धार निकली और चेहरे के ऊपर पड़ने से वो बेहोश हो गया।