‘मैं मर नहीं रहा बल्कि आजाद भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूं’

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‘मैं मर नहीं रहा बल्कि आजाद भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूं’‘मैं मर नहीं रहा बल्कि आजाद भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूं’‘मैं मर नहीं रहा बल्कि आजाद भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूं’

गोण्डा: काकोरी कांड की बदौलत अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला देने वाले अमर शहीद राजेन्द्र नाथ लाहिडी ने फांसी के तख्ते पर चढऩे से पहले जेलर से हंसते हुये कहा था ‘मैं मर नहीं रहा बल्कि स्वतंत्र भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूँ।’ गोंडा जिला जेल में आजादी के मतवाले सिपाही को 17 दिसंबर 1927 को फांसी दे दी गयी थी। फांसी के फंदे को चूमने के बाद लाहिडी की ‘वंदेमातरम्’ की गगनभेदी हुंकार से अंग्रेज अधिकारी हिल गये थे। उन्हें एहसास हो गया था कि लाहिड़ी की फाँसी के बाद अब रणबांकुरे उन्हे चैन से जीने नहीं देंगे। 

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