बुलंदशहर गैंगरेप कांड: सुप्रीम कोर्ट ने आजम का माफीनामा किया मंजूर

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नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार मामले में दिये गये बयान को लेकर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खान का बिना शर्त माफीनामा आज मंजूर कर लिया। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की पीठ ने गत सात दिसंबर को खान का माफीनामा नामंजूर करते हुए एक सप्ताह के भीतर नया माफीनामा दायर करने का आदेश दिया था। इस पर अमल करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता ने आज एक बार फिर माफीनामा दायर किया, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया।

कोर्ट ने बिना शर्त माफी मांगने का दिया था निर्देश 
न्यायालय ने बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार मामले को लेकर दिये गये बयान को लेकर आजम खान को बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया था। गत 18 नवंबर को सुनवाई के दौरान सपा नेता ने बिना शर्त माफी मांगने की बात स्वीकार की थी। आजम खान ने न्यायालय में गत सात नवंबर को दाखिल हलफनामे में कहा था, ‘अगर कोई मेरे बयान से आहत हुआ है, तो मैं माफी मांगता हूं।’ एटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और मामले में न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस नरीमन ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि आजम खान ने जो स्पष्टीकरण दिया है, वह बिना शर्त नहीं है। उन्होंने कहा कि हलफनामे में ‘अगर’ शब्द से नहीं लग रहा है कि वह बिना शर्त माफी मांग रहे हैं। इस पर शीर्ष अदालत ने आजम खान से कहा था कि वह इस मामले में दोबारा हलफनामा दायर करें और बिना शर्त माफी मांगें। 

बुलंदशहर गैंगरेप को बताया था राजनीतिक साजिश 
गौरतलब है कि आजम खान ने नोएडा की मां-बेटी के साथ बुलंदशहर हाईवे पर हुए सामूहिक बलात्कार को राजनीतिक साजिश करार दिया था। उन्होंने कहा था कि इसके पीछे राजनीतिक साजिश हो सकती है। हो सकता है कि सरकार को बदनाम करने के लिए इस घटना को अंजाम दिया गया हो।  सपा नेता के इस बयान के विरुद्ध बलात्कार पीड़िताओं ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये और मामले की सुनवाई दिल्ली से बाहर करवाई जाये। 

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