कोरोना काल में संक्रमण से बचाव के लिए जेल के कैदी को मिला पैरोल, फिर भी घर जाने से किया इनकार

Edited By Tamanna Bhardwaj,Updated: 30 May, 2021 03:50 PM

prison prisoner gets parole to prevent infection in corona perio

कोरोना वायरस का संक्रमण जहां पूरे देश में अपना आतंक मचा कर लाखों लोगों को संक्रमित कर चुका है, तो वहीं हजारों लोगों को मौत की नींद सुला चुका है। इसी क्रम में कोरोना काल में जेल में बंद कैदियों को पैरोल पर रिहा किया जा रहा है, जिससे जेल में बंद...

मेरठः कोरोना वायरस का संक्रमण जहां पूरे देश में अपना आतंक मचा कर लाखों लोगों को संक्रमित कर चुका है, तो वहीं हजारों लोगों को मौत की नींद सुला चुका है। इसी क्रम में कोरोना काल में जेल में बंद कैदियों को पैरोल पर रिहा किया जा रहा है, जिससे जेल में बंद कैदियों के चेहरों पर भी मुस्कुराहट रही है, लेकिन इसी बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसमें की जेल में बंद कैदी को पैरोल मिलने के बावजूद उसने जेल से बाहर जाने से इनकार कर दिया, क्योंकि कैदी का मानना है कि वो जेल में ज्यादा सुरक्षित है और कोरोना काल में जेल में मौजूद सुविधाएं उसे ये भरोसा दिला रही हैं कि वो जेल में सुरक्षित रहेगा।

दरअसल, मेरठ कि चौधरी चरण सिंगज ज़िला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ बी डी पांडेय ने बताया कि मेरठ जेल में एक बंदी आशीष जोकि दहेज के मामले में सजा काट रहा है। उसे पैरोल पर रिहा किया जाना था, लेकिन बंदी ने पैरोल पर रिहा होने से इंकार कर दिया। वरिष्ठ जेल अधीक्षक का कहना है कि बंदी ने कहा है कि वो जेल में ज्यादा सुरक्षित और स्वस्थ महसूस कर रहा है। साथ ही बंदी ने यह भी कहा है कि जेल में सैनिटाइजेशन समेत अन्य एहतियात के कदम उठाए जा रहे हैं जो उसे कोरोना से महफूज़ होने का एहसास दे रहे हैं। इसी के चलते वो पैरोल पर नहीं जाएगा बल्कि अपनी सजा पूरी करने के बाद ही जेल से निकलेगा।

वहीं मेरठ की चौधरी चरण सिंह ज़िला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक बी डी पांडेय ने बताया कि शासन के आदेश पर 42 सिद्ध दोषियों को पैरोल पर अब तक रिहा किया जा चुका है जबकि 325 विचाराधीन  बंदियों को न्यायालय के आदेश पर अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया है। वहीं इस मामले पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक का कहना है कि पैरोल पर रिहा होने के बाद जेल से ना निकलने का यह पहला मामला सामने आया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पैरोल का जो 2 महीने का वक्त मिलता है यह किसी को छूट नहीं देता है इस अवधि को बाद में बंदी को जेल में बिताना पड़ता ही है। 
 

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