दहेज के लिए पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को मौत की सजा, मुजफ्फरनगर कोर्ट का बड़ा फैसला

Edited By Ramkesh,Updated: 07 Sep, 2026 08:31 PM

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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की एक त्वरित अदालत ने दहेज की मांग को लेकर 2018 में अपनी पत्नी को जिंदा जलाकर मारने के मामले में एक व्यक्ति को सोमवार को मौत की सजा सुनाई। इसके साथ ही पिछले चार महीनों में इस अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजाओं की...

मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की एक त्वरित अदालत ने दहेज की मांग को लेकर 2018 में अपनी पत्नी को जिंदा जलाकर मारने के मामले में एक व्यक्ति को सोमवार को मौत की सजा सुनाई। इसके साथ ही पिछले चार महीनों में इस अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजाओं की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। सरकारी अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने आरोपी नदीम को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 302 और 504 के तहत दोषी ठहराते हुए उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 

उन्होंने बताया कि यह मामला आठ साल पुराना है। इसमें नदीम पर आरोप था कि उसने 23 जुलाई 2018 को मुजफ्फरनगर जिले के शाहपुर कस्बे में दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी शहजादी (23) को आग लगा दी थी। कुमार ने बताया कि गंभीर रूप से झुलसी शहजादी को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जहां बाद में उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि मौत से पहले शहजादी का बयान दर्ज किया गया था, जिसमें उसने कथित रूप से अपने पति पर आग लगाने का आरोप लगाया था।

सरकारी अधिवक्ता के अनुसार, मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के सभी 11 गवाह अपने बयान से मुकर गए, लेकिन अदालत ने शहजादी के मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर नदीम को दोषी ठहराया। पुलिस ने 23 नवंबर 2018 को नदीम, उसकी मां शमशिदा और बहन सोनी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। कुमार ने बताया कि साक्ष्यों के अभाव में सोनी को बरी कर दिया गया, जबकि मुकदमे की सुनवाई के दौरान शमशिदा की मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि शहजादी और नदीम का विवाह 10 जनवरी 2015 को हुआ था। 

सरकारी अधिवक्ता के मुताबिक, सोमवार के फैसले के बाद न्यायाधीश दिवाकर की अदालत ने पिछले चार महीनों में 11 अलग-अलग मामलों में 23 लोगों को मौत की सजा सुनाई है। इससे पहले, अगस्त में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर की अदालत में लंबित करीब 100 हत्या के मामलों को प्रशासनिक आदेश के तहत जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था। कुलदीप कुमार ने बताया था कि मौत की सजा या उम्रकैद से जुड़े अपराधों वाले इन मामलों को दिवाकर की अध्यक्षता वाली फास्ट ट्रैक अदालत से जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिंह की अदालत में भेजा गया है। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने बताया था कि यह स्थानांतरण वकीलों और वादकारियों के बीच अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने की आशंकाओं के बीच किया गया था। 
 

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