सरकार की कथनी और करनी में अंतर, 108 के पहिए जाम

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सरकार की कथनी और करनी में अंतर, 108 के पहिए जामसरकार की कथनी और करनी में अंतर, 108 के पहिए जामसरकार की कथनी और करनी में अंतर, 108 के पहिए जाम

उत्तराखंड(जगदीश उपाध्याय बागेश्वर): राज्य में विकास को लेकर सरकार द्वारा बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं लेकिन सच्चाई इससे विपरीत है। पिछले करीब 3 महीनों से 108 सेवा पूर्ण रूप से बंद है, लेकिन सरकार द्वारा इसको लेकर कोई ठोस कदम नही उठाया जा रहा। इससे साफ पता चलता है कि सरकार की कथनी और करनी में बहुत अंतर है। सरकार का पूरा ध्यान इस वक्त अपनी आय बढ़ाने पर केंद्रित है।

108 आपातकालीन सेवा का इस तरह से बंद हो जाना राज्य सरकार की लापरवाही को दर्शाता है। जनता ने जिस सरकार का चयन राज्य के विकास के लिए किया था वह अपनी ही जरुरतों को पूरा करने में व्यस्त है। यह सेवा लोगों के लिए वरदान साबित हुई थी।

खास तौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए यह सेवा एक वरदान बन गई थी पर इसका बंद होना पहाड़ वासियो के लिए दुख का विषय है। इसके ठप हो जाने के चलते मरीजो को काफी परेशानी हो रही है। फोन करने पर मालूम चलता है कि यह सुविधा मौजूद नही है जिसका कारण बजट न होना बताया जा रहा है।

कंडिडेटर से बात करने पर पता चला है कि उनके डीजल, मेंटीनेंस और टायरों के लिए  फंड नही है साथ ही साथ ड्राइवरों की तनख्वाह भी 4 महीनों से नही आई है। जैसे ही बजट आता है वैसे ही सेवा को शुरु कर दिया जाएगा। 


 



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