अवैध खनन पर योगी सरकार सख्त, कैबिनेट ने जुर्माना व सजा में किया इजाफा

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब अवैध खनन का दोषी पाए जाने पर पहले की तुलना में 20 गुना ज्यादा जुर्माना देना होगा। यही नहीं मामले में अब सजा भी 6 महीने से बढ़ाकर 5 साल कारावास कर दी गई है। लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई कैबिनेट की 7वीं बैठक में यह फैसला हुआ। नई व्यवस्था के तहत प्रति हैक्टेयर अवैध खनन पर 25 हजार रुपए के जुर्माने की राशि बढ़ाकर 5 लाख कर दी गई है।

इसके अलावा कैबिनेट ने ईंट-भट्ठा मालिकों व घरेलू उपयोग और मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए किए जाने वाले खनन में रियायत भी दी गई है। ईंट-भट्ठा मालिकों को खनिज रॉयल्टी जमा करने में देरी होने पर पहले 24 फीसदी ब्याज देना होता था, अब इसे घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है। साथ ही खान माइनिंग प्लान बनाने के लिए कैबिनेट ने योग्यता निर्धारित कर दी है। इसके तहत पहले भारतीय खान ब्यूरो से मान्यता प्राप्त संस्थान ही अधिकृत थे, लेकिन अब विश्वविद्यालयों से माइनिंग इंजीनियरिंग के डिग्री धारक और भूतत्व विषय से पोस्ट ग्रैजुएट भी योग्य माने जाएंगे। इसके लिए उनके पास 5 वर्ष का अनुभव जरूरी होगा।

प्रदेश सरकार ने जिला अदालतों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता साफ कर दिया है। कैबिनेट में द उत्तर प्रदेश स्टेट डिस्ट्रिक्ट कोर्ट सर्विस रूल्स में प्रथम संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। इसके बाद खाली पदों के सापेक्ष 20 प्रतिशत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तृतीय श्रेणी में प्रमोट हो सकेंगे। कैबिनेट ने साथ ही न्यायालयों में तैनात ट्यूबवैल ऑप्रेटरों और इलैक्ट्रीशियन के लिए आई.टी.आई. की डिग्री अनिवार्य किए जाने के प्रस्ताव का भी मंजूरी दे दी है। इससे पहले डिग्री की अनिवार्यता नहीं थी।

उन्नत प्रजाति के बीजों पर विशेष अनुदान
कैबिनेट ने प्रमाणित बीजों पर अनुदान देने की योजना के तहत धान, गेहूं, जौ एवं  तिल फसलों के बीजों पर प्रोत्साहन के  लिए किसानों को उन्नतिशील प्रजातियों पर विशेष अनुदान दिए जाने का फैसला किया है। पहले से चली आ रही इस व्यवस्था को एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया है। इस पर करीब 32 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

दरअसल, उपज बढ़ाने में बीज की 20-25 फीसदी भूमिका होती है। कैबिनेट ने धान, गेहूं, जौ, तिलहन और अन्य फसलों के प्रमाणित बीजों पर विशेष अनुदान देने का निर्णय लिया है। सरकार की मंशा है कि किसान परंपरागत प्रजातियों की जगह अधिक उपज देने  वाली और प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधी प्रजाति के बीजों का प्रयोग करें। इसके लिए इन पर जहां विशेष अनुदान दिया जाएगा, वहीं 10 साल से पुरानी प्रजातियों पर अनुदान की राशि खत्म की जाएगी।



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