काशी: गंगा आरती पर दिखा अद्भुत नजारा, मॉरीशस के PM ने की मोदी की प्रशंसा (Pics)

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काशी: गंगा आरती पर दिखा अद्भुत नजारा, मॉरीशस के PM ने की मोदी की प्रशंसा (Pics)काशी: गंगा आरती पर दिखा अद्भुत नजारा, मॉरीशस के PM ने की मोदी की प्रशंसा (Pics)काशी: गंगा आरती पर दिखा अद्भुत नजारा, मॉरीशस के PM ने की मोदी की प्रशंसा (Pics)

वाराणसी: पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में दीपावली के 15वें दिन कार्तिक पूर्णिमा पर काशी में शहीदों को समर्पित देव दीपावली उत्‍सव मनाया जा रहा है। सभी घाटों को दीपों से दुल्हन की तरह सजाया गया। पूजा के बाद गंगा आरती शुरू हो गई है। इस मौके पर मॉरीशस के पीएम अनिरुद्ध जगन्‍नाथ और सिंगर कैलाश खेर भी मौजूद थे। जगन्‍नाथ ने कहा कि पीएम मोदी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। नोट पर बैन लगाने का फैसला सही है। मोदी जो फैसले लेते है उसका असर बाद में जनता को समझ में आएगा।

भोजपुरी भाषा को धरोहर सूची में शामिल करने का किया अनुरोध
जानकारी के अनुसार दुनिया भर में भोजपुरी भाषा को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए मॉरीशस के प्रधानमंत्री अनिरूद्ध जगनाथ ने यहां कहा कि उनका देश इस भाषा को धरोहर दर्जा देने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि मॉरीशस जल्द ही यूनेस्को को एक प्रस्ताव भेज कर इससे भोजपुरी भाषा को धरोहर सूची में शामिल करने का अनुरोध करेगा ताकि हमारी भोजपुरी भाषा को वाजिब सम्मान मिल सके। इस भाषा को बढ़ावा देने के लिए मॉरीशस में काफी काम किए जाने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां तक कि भोजपुरी भाषा को बढ़ावा देने के लिए हमारे स्कूलों में छात्रों को यह पढ़ाई जाती है। जगनाथ और उनकी पत्नी सरोजिनी देव दीपावली की पूर्व संध्या पर  शहर स्थित भैसासुर घाट गए। उन्होंने शहीद भारतीय सैनिकों को यहां घाट पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।

क्यों मनाई जाती है देव दीपावली?
पंडितों का कहना है कि तीनों लोक त्रिपुरासुर दैत्य के आतंक से आतंकित था।देवताओं पर अत्याचार और उनकों तप को रोकने के लिए त्रिपुरासुर ने स्वर्ग लोक पर भी अपना कब्जा जमा लिया था। त्रिपुरासुर ने प्रयाग में काफी दिनों तक तप किया था। उसके तप से तीनों लोक जलने लगे। तब ब्रह्मा ने उसे दर्शन दिए। त्रिपुरासुर ने उनसे वरदान मांगा कि उसे देवता, स्त्री, पुरुष, जीव ,जंतु, पक्षी, निशाचर न मार पाएं। इसी वरदान से त्रिपुरासुर अमर हो गया था। विष्णु ने भी त्रिपुरासुर से लड़ने के लिए मना कर दिया था, क्योंकि कोई भी देव उसकी मृत्यु का कारण नहीं बन सकता था। विष्णु के कहने पर देवता ब्रह्मा जी से मिले। ब्रह्मा जी ने देवताओं को त्रिपुरासुर के अंत का रास्ता बताया। 

कैसे किया त्रिपुरासुर का वध?
देवता भगवान शंकर के पास पहुंचे और उनसे त्रिपुरासुर को मारने के लिए प्रार्थना की। तब महादेव ने त्रिपुरासुर के वध का फैसला किया। महादेव ने तीनों लोकों में दैत्य को ढूंढ़ा। चतुर त्रिपुरासुर को ये पता चल चुका था कि महादेव उसे तलाश रहे हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन महादेव ने प्रदोष काल में अर्धनारीश्वर के रूप में त्रिपुरासुर का वध किया। उसी दिन देवताओं ने शिवलोक यानि काशी में आकर दीपावली मनाई। तभी से ये परंपरा काशी में चली आ रही हैं ।

कब मनाई जाती है देव दीपावली
ऐसा माना जाता है कि इस तिथि से पहले कार्तिक के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानि देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु नींद से जागते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि दीपावली पर महालक्ष्मी अपने स्वामी भगवान विष्णु से पहले जाग जाती हैं, इसलिए दीपावली के 15वें दिन देवताओं की दीपावली मनाई जाती है।

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