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मनोज सिन्हा ने दिव्यांग की बेटी का स्कूल में कराया एडमिशन, बताया जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य

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मनोज सिन्हा ने दिव्यांग की बेटी का स्कूल में कराया एडमिशन, बताया जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्यमनोज सिन्हा ने दिव्यांग की बेटी का स्कूल में कराया एडमिशन, बताया जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्यमनोज सिन्हा ने दिव्यांग की बेटी का स्कूल में कराया एडमिशन, बताया जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य

गाजीपुरः बेटियां घर की रौनक होती हैं। बेटियां अपने इल्म से दो घरों को संभाल कर स्वर्ग की अनुभूति कराती हैं। इसी वाक्य को सच मानते हुए रविवार को रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने एक दिव्यांग मां की बेटी को अपनी बटी मानते हुए उस बच्ची का हाथ पकड़ कर स्कूल ले गए और उसका स्कूल में एडमिशन कराया। इतना नहीं उसका पूरा खर्च भी खुद किया।
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दरअसल बच्ची की मां रिंकू जन्म से ही दिव्यांग है। शादी के बाद रिंकू के घर एक बच्ची ने जन्म लिया। जिसके बाद पति की रिंकू से अनबन होने लगी। पति ने रिंकू पर चाकूओं से हमला कर दिया। 1 या 2 बार नहीं बल्कि रिंकू पर करीब 17 बार चाकू से वार किया। ताकि रिंकू को मौत के घाट उतार दिया जाए, लेकिन कहते है ना जाको राखे साइयां मार सके ना कोय।
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इस घटना की जानकारी जब रेल राज्य मंत्री के निजी सचिव सिद्धार्थ राय को हुई तो उन्होंने रिंकू का इलाज कराया और उसके पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। वक्त के चलते रिंकू की बेटी बड़ी हो गई। अब रिंकू के सामने सबसे बड़ी समस्या थी कि वो अपना पेट पाले या बेटी को पढ़ाए। यह बात जब सिद्धार्थ को पता चला तो उसने यह बात मंत्री के सामने रखी।
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जिसके बाद मनोज सिन्हा ने इसे एक जरुरी काम समझा और मकर संक्रांति पर जब स्कूल बंद चल रहे है तो पर्सनल रिक्वेस्ट पर स्कूल का कार्यालय खुलवा कर एक जिम्मेदार नागरिक व अभिभावक की तरह बच्ची का हाथ पकड़ कर स्कूल पहुंचे और उसका दाखिला कराया। इस दौरान मंत्री ने इसे एक सामाजिक व एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य बतलाया।
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वहीं स्कूल के डायरेक्टर समीर अहमदी ने बताया कि वो इस बेटी के लिए 12 तक की निशुल्क शिक्षा का पूरा प्रयास करेंगे। वहीं रोते हुए रिंकू ने मनोज सिन्हा का धन्यवाद किया। 



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