किसानों ने दी चेतावनी, कहा- गंगा का पानी नहीं मिला तो करेंगे आत्मदाह

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किसानों ने दी चेतावनी, कहा- गंगा का पानी नहीं मिला तो करेंगे आत्मदाहकिसानों ने दी चेतावनी, कहा- गंगा का पानी नहीं मिला तो करेंगे आत्मदाहकिसानों ने दी चेतावनी, कहा- गंगा का पानी नहीं मिला तो करेंगे आत्मदाह

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश में सहारनपुर जिले के देवबंद क्षेत्र के कई गांवों के किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर खेती के लिए गंगा लिंक नहर का पानी दिए जाने की मांग करते हुए कहा कि अगर 21 मई तक उनकी मांंग नहीं मानी गई तो दो किसान विधान भवन के सामने आत्मदाह करेंगे।

जडौदा पाण्डा एवं उसके आसपास के 12 से अधिक गांव के किसानों ने गत 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर कहा है कि देवबंद विधानसभा क्षेत्र के किसान पिछले 18 साल से यमुना में पानी की कमी के कारण सिंचाई से वंचित है। यमुना की नल्हेडा माईनर जडौदा पाण्डा में पिछले 32 साल से पानी नहीं आ रहा है। किसान सिंचाई विभाग के अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर लगाकर परेशान हैं लेकिन किसानों की कोई सुनवाई नहीं हुई।

मुख्यमंत्री को भेेजे पत्र में किसानों ने कहा कि जडौदा पाण्डा गांव के रजवाहे के ऊपर से गुजर रही गंगा की नई लिंक नहर देवबंद ब्रांच से यमुना रजवाहे में पानी दिया जाए जिससे क्षेत्र के 12 से अधिक गांवों के किसानों की फसलों को बचाया जा सकता है। किसानों का आरोप है कि विभाग के बडे अधिकारी एवं मुख्य अभियंता नई दिल्ली ओखला इसे नकार देते हैं। किसानों ने मुक्यमंत्री से इस मामले में दखल देने की मांग करते हुए कहा है कि किसानों की 18 साल पुरानी मांग पर गौर कर गंगा की ब्रांच नहर से पानी दिलाने की व्यवस्था करें। क्षेत्र के किसान प्रिन्स और अरविन्द त्यागी का कहना है कि क्षेत्र में भू-जल स्तर निरन्तर नीचे जा रहा है जिससे किसानों के नलकूप बंद हो रहे हैं और सिंचाई के लिए परेशानी हो रही है।

किसानों का कहना है पूर्व सिंचाई मंत्री अनुराधा चौधरी ने गंगा की नहर से 265 क्यूसेस पानी देकर कल्लरपुर रजवाहे को दे दिया था लेकिन जडौदा पाण्डा इलाके के 12 से अधिक गांव की उपेक्षा की गई। क्षेत्र के किसानों ने गंगा का पानी नहीं दिए जाने की मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार करने की घोषणा की थी लेकिन उस समय केन्द्रीय मंत्री संजीव बालियान और अन्य नेताओं ने किसानों का चुनाव बहिष्कार समाप्त कराकर 15 दिन के भीतर उनकी समस्या के समाधान का वादा किया था, लेकिन राज्य में सरकार बनने के बाद भी किसानों की मांग पूरी नहीं हुई।



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