टिकट बंटवारे में खींचतान से इतर अखिलेश चुनावी बिगुल को करेंगे और तेज

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लखनऊ: टिकट बंटवारे को लेकर उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ समाजवादी पार्टी में जारी खींचतान के बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पार्टी कार्यक्रम से अलग अपने चुनाव प्रचार अभियान को और हवा दे सकते हैं। अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव के साथ मतभेद सार्वजनिक होने के तुरंत बाद 24 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी (सपा) कार्यालय में एक बैठक के दौरान अखिलेश ने कहा था कि झगड़े को तवज्जो देने के बजाय वह प्रचार पर ज्यादा ध्यान देना पसंद करेंगे। उन्होने अपने आधिकारिक आवास के सामने ला मार्टिनियर स्कूल मैदान पर तीन नवम्बर को प्रचार की शुरूआत भी कर दी थी। पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया कि अखिलेश की रथ यात्रा के जरिए जनता को संदेश दिया जाएगा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में काम खुद विकास की तस्वीर बयां करने के लिए काफी है और यादव सूबे में दोबारा नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार है। हालांकि यादव ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि चुनाव आने तक टिकट तो कटते बंटते रहेंगे मगर प्रचार तो चलता रहना चाहिए। रथ यात्रा के दो चरणो की समाप्ति और पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव की दो रैलियों से किनारा कर मुख्यमंत्री साफ कर चुके हैं कि वह अपने बूते प्रचार की बागडोर संभालने में समर्थ है और चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें पार्टी के अन्य किसी वरिष्ठ नेता के साथ मंच साझा करने की जरूरत नहीं है।

CM की पहली रथ यात्रा लखनऊ से उन्नाव के बीच थी
अखिलेश यादव की पहली रथ यात्रा लखनऊ से उन्नाव के बीच थी जबकि दूसरी रथयात्रा में उन्होंने मुरादाबाद से रामपुर के बीच जनता जनार्दन का मन टटोला था। मुख्यमंत्री का रथ 15 दिसम्बर को बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले में निकलेगा। इससे पहले उन्होंने अपने पिता और पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की 23 नवम्बर को गाजीपुर रैली और आठ दिसम्बर को बरेली की जनसभा मेें शिरकत नही की थी। सूत्रों ने बताया कि चुनाव के लिए टिकट वितरण को लेकर नाखुशी जता चुके अखिलेश यादव प्रचार के दौरान उन विधानसभा क्षेत्रों में जाने से कतरा सकते हैं जहां उनकी गैर पसंद का उम्मीदवार मैदान में है।

देवरिया और गोरखपुर में बड़ी रैलियां कर सकती है सपा
उधर, पूर्वी उत्तर प्रदेश पर खास तवज्जो दे रही सपा आने वाले दिनों में देवरिया और गोरखपुर में बड़ी रैलियां कर सकती है हालांकि दोनों रैलियों की तारीख अभी फाइनल नहीं हुई है। देवरिया में रैली क्रिसमस के बाद होनी प्रस्तावित है। सत्तारूढ दल के नेता हालांकि इस बात पर कायम हैं कि ‘यादव परिवार’ में गिले शिकवे अब दूर हो चुके हैं और परिवार में किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है। हर नेता पार्टी के प्रति पूरे समर्पण और एकजुटता के साथ पूरी ताकत से प्रचार में जुटा है।

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