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एडीएम के आैचक निरीक्षण से बेखाैफ डॉक्टर, मरीजाें काे दे रहे निजी अस्पताल में जाने की सलाह

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एडीएम के आैचक निरीक्षण से बेखाैफ डॉक्टर, मरीजाें काे दे रहे निजी अस्पताल में जाने की सलाहएडीएम के आैचक निरीक्षण से बेखाैफ डॉक्टर, मरीजाें काे दे रहे निजी अस्पताल में जाने की सलाहएडीएम के आैचक निरीक्षण से बेखाैफ डॉक्टर, मरीजाें काे दे रहे निजी अस्पताल में जाने की सलाह

बुलन्दशहर(इकबाल सैफी): यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ भले ही यूपी की स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने का संकल्प ले चुके हों, लेकिन प्रदेश की लचर स्वास्थ्य सेवाएं किसी से छुपी नहीं हैं। ताजा मामला बुलन्दशहर जिले का है। जहां स्वास्थ्य सेवाओं का मुआयना करने के लिए बुलन्दशहर एडीएम ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया, लेकिन इसका कितना मरीजाें काे फायदा मिला अस्पताल का हाल देखकर अंदाजा बखूबी लगाया जा सकता है।

दरअसल बुलन्दशहर के एडीएम अरिवंद मिश्र जिला अस्पताल में ओपीडी से लेकर एंबुलेंस तक का जायजा लेने पहुंचे। लेकिन बुलन्दशहर जिला अस्पताल की जो हालत है, वो कल की तरह आज भी बद से बदतर है। यूं तो ये हाल यूपी के किसी एक जिले के जिला अस्पताल का नहीं बल्कि ज़्यादातर जिलों के अस्पतालों का यही हाल है। 
PunjabKesariवहीं इस सिलसिले में मौजूद एक मरीज के परिजन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मेरी भांजी पर मिट्टी का ढेर गिरने से उसकी टांगों पर फ्रैकचर हो गया है। लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने हड्डी स्पेशलिस्ट ना होने का हवाला देकर बच्ची को निजी अस्पताल में भर्ती कराने की नसीहत दी है। 

क्या कहते हैं एडीएम
जब इस बारे में एडीएम अरविंद मिश्र से बात की गई ताे उन्हाेंने कहा कि बच्ची को भर्ती करा दिया गया है। इलाज के संबंध में सीएमओ से वार्ता कर उसे बेहतर इलाज दिलाया जाएगा।
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अब सवाल ये उठता है कि अगर जिला अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती कराने की नसीहत देंगे तो सरकार के करोड़ों रुपया गरीबों के इलाज पर खर्चना किस काम का है?



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