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आप ने की हज सब्सिडी वापस लेने की आलोचना

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आप ने की हज सब्सिडी वापस लेने की आलोचनाआप ने की हज सब्सिडी वापस लेने की आलोचनाआप ने की हज सब्सिडी वापस लेने की आलोचना

लखनऊ: दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) नेता राजेन्द्र पाल गौतम ने हज यात्रा की सब्सिडी वापस लेने के लिए नरेन्द्र मोदी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के पिछड़ेपन के लिए केन्द्र की नीतियां जिम्मेदार हैं।

गौतम ने पत्रकारों से कहा कि हज यात्रा से सब्सिडी वापस लेने का निर्णय गलत है और यह मुस्लिमों के प्रति सरकार का उपेक्षात्मक रवैया दर्शाता है। संविधान सभी धर्मावलम्बियों को समान अधिकार देता है, लेकिन कैलाश मानसरोवर यात्रा, कुम्भ मेला, कांवर यात्रा और छठ पूजा में सरकारी पैसा खर्च किया जाता है। सरकार का यह रवैया पक्षपातपूर्ण है। 9 राज्यों के अल्पसंख्यक और समाज कल्याण मंत्रियों की बैठक में भाग लेने आए गौतम ने केन्द्र सरकार से अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार का आग्रह किया। मुस्लिम धर्मगुरुओं द्वारा सब्सिडी वापस लेने का स्वागत किए जाने सम्बन्धी सवाल पूछने पर आप नेता ने कहा कि मीडिया ने मुस्लिम धर्मगुरुओं को भ्रमित कर दिया है।

गौतम ने कहा कि मीडिया ने इस मसले को हलका कर दिया, जबकि यह एक बड़े वर्ग के अधिकारों से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि बीते गुरुवार को 9 राज्यों के मंत्रियों की यहां हुई बैठक का उत्तर प्रदेश सरकार खूब प्रचार कर रही है। लखनऊ की सड़कों को बैनरों, पोस्टरों और होर्डिग्स से पाट दिया गया था। उन्होंने इसे फिजूलखर्च बताया। सच्चाई है कि इसका जितना प्रचार किया जा रहा है उतनी बड़ी बैठक नहीं थी। मुसलमानों के पिछड़ेपन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) से कर्ज लेने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

इस संस्था से कर्ज लेने के नियमों के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की आय 65 हजार रुपए और शहरों में रहने वालों की वार्षिक आय एक लाख बीस हजार रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। कर्ज लेने में लोगों के सामने काफी मुश्किलें आती हैं। नियम शिथिल होने चाहिए। मुसलमानों की शिक्षा की व्यवस्था और बेहतर होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि करीब 80 प्रतिशत मुस्लिम बच्चों की कक्षा 8 पास करने के बाद पढ़ाई छूट जाती है। कई राज्यों ने नीतियों में बदलाव की मांग की है, लेकिन केन्द्र तैयार ही नहीं हो रहा है। कौशल विकास योजना के तहत मुस्लिम युवकों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।




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